Tawang Clash: LAC पर झड़प के बावजूद, भारत और चीन के बीच व्यापार पर पड़ा कितना असर, क्या कहते हैं आंकड़े, डालें एक नजर

Tawang Clash: दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद, एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार फल-फूल रहा है। अपनी अर्थव्यवस्था को चीन से अलग करने की कोशिशों के बावजूद, दिल्ली की अपने पड़ोसी देशों पर व्यापार निर्भरता केवल बढ़ी है

अपडेटेड Dec 15, 2022 पर 1:53 PM
Tawang Clash: भारत और चीन के बीच व्यापार पर पड़ा कितना असर (FILE PIC)

Tawang Clash: अरुणाचल प्रदेश (Arunchal Pradesh) के तवांग सेक्टर (Tawang Sector) में पिछले हफ्ते भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प (India China Clash) हुई। 2020 के बाद सीमा पूर्वी छोर पर हुई इस तरह कि ये दूसरी झड़प है। दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद, एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार फल-फूल रहा है। अपनी अर्थव्यवस्था को चीन से अलग करने की कोशिशों के बावजूद, दिल्ली की अपने पड़ोसी देशों पर व्यापार निर्भरता केवल बढ़ी है।

भारत और चीन के बीच कुल व्यापार पिछले पांच सालों में 29 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2022 में 115.44 अरब डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2018 में 89.72 अरब डॉलर था। इसके उलट एक तथ्य ये भी है कि भारत ने पिछले दो सालों में चीन की सेना की तरफ से सीमा पर आक्रामकता की कई घटनाओं का सामना किया है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के भारत-चीन व्यापार डेटा पर करीब से नजर डालने से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही के बीच और चालू वित्त वर्ष 2022-'23 की पहली छमाही में, चीन से भारतीय आयात (Import) में बढ़ोतरी हुई है और निर्यात (Export) गिर गया है।


इसके चलते चीन की तुलना में भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। समझने के लिए बता दें, व्यापार घाटा, वो होता है, जब किसी देश के इंपोर्ट की लागत उसके एक्सपोर्ट के वैल्यू से ज्यादा हो जाती है। FY22 में भारत का व्यापार घाटा बढ़ कर 73 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो FY18 में 63 अरब डॉलर था।

एक्सपोर्ट में गिरावट

अपने से ज्यादा आबादी वाले पड़ोसी देशों में भारत का एक्सपोर्ट 2020-'21 की पहली छमाही में 10.6 बिलियन डॉलर से गिरकर 2022-'23 की पहली छमाही में 7.8 बिलियन डॉलर हो गया।

भारत ने FY22 में दुनिया को 422.2 बिलियन डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया। इसमें भारत के कुल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 5 फीसदी से ज्यादा है।

चीन को भारत इंजीनियरिंग प्रोडक्ट (5.4 बिलियन डॉलर), कृषि और उससे जुड़े प्रोडक्ट (3.8 बिलियन डॉलर), और एंड मिनरल (2.9 बिलियन डॉलर), कैमिकल प्रोडक्ट (2.9 अरब डॉलर), और पेट्रोलियम और कच्चे उत्पाद (1.9 अरब डॉलर) एक्सपोर्ट करता है।

इंपोर्ट में बढ़ी निर्भरता

वित्ती वर्ष 2020-'21 की पहली छमाही के बीच, जब गालवान संघर्ष हुआ था, और चालू वित्त वर्ष 2022-'23 में इसी अवधि के बीच, चीन से भारत का आयात लगभग 27.3 बिलियन डॉलर से बढ़कर 52.4 बिलियन डॉलर हो गया।

VIDEO: तवांग झड़प के बीच, सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा भारत और चीन के सैनिकों के बीच मार पिटाई का वीडियो

इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल, मेडिसिनल और फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट और फर्टिलाइजर कथित तौर पर कुछ प्रमुख सामान हैं, जिनका भारत चीन से आयात करता है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने राज्यसभा को बताया कि ऐसी कैटेगरी में इंपोर्ट पर भारत की निर्भरता "मुख्य रूप से घरेलू सप्लाई और डिमांड के बीच अंतर के कारण है।"

FY22 में, भारत के कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी 15.4 प्रतिशत थी। भारत ने दुनिया से 613.2 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया, जिसमें अकेले चीन से 94.2 बिलियन डॉलर का सामान शामिल है।

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