Bank of America : अगले वित्त वर्ष में 8.2% रह सकती है भारत की GDP ग्रोथ, लेकिन डाउनसाइड रिस्क भी बरकरार

ब्रोकरेज ने कहा कि अन्य बाहरी जोखिमों के साथ मॉनिटरी पॉलिसी के नॉर्मल होने और ऊंची महंगाई से कंजम्प्शन डिमांड घट सकती है

अपडेटेड Dec 24, 2021 पर 6:17 PM
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महामारी के दौर के बाद भारतीय इकोनॉमी में मजबूती दिखने का अनुमान है

Bank of America : वाल स्ट्रीट की ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका ने अगले वित्त वर्ष में भारत के जीडीपी में 8.2 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान जाहिर किया है। इसके पीछे उसने पिछले दो वर्ष की तुलना मे नए साल में ज्याद जोखिमों का हवाला दिया है।

ब्रोकरेज ने कहा कि अन्य बाहरी जोखिमों के साथ मॉनिटरी पॉलिसी के नॉर्मल होने और ऊंची महंगाई से कंजम्प्शन डिमांड घट सकती है। उसने कहा कि अगले वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान में और गिराटव का जोखिम है।

अगले साल बढ़ सकती है महंगाई

रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 5.3 फीसदी महंगाई के साथ चालू वित्त वर्ष के लिए 9.5 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रहने का अनुमान जाहिर किया है। एक रिपोर्ट में इकोनॉमिस्ट्स ने वित्त वर्ष 23 में औसत रिटेल महंगाई 5.6 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया। इसमें कहा गया कि सभी ग्लोबल कमोडिटीज की कीमतें ऊंची रहने से कंज्यूमर प्राइस में बढ़ोतरी एक प्रमुख चिंता है।

महंगाई पर, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास ने मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग में कहा था कि नवंबर में भारी बारिश के चलते उन्हें निकट भविष्य में सब्जियों की कीमतों बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि, सर्दियों की ताजी फसल आने से कीमतों में गिरावट की उम्मीद है।


उन्होंने कहा, “सरकार की हाल की आपूर्ति में किए गए हस्तक्षेप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इडिबिल ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर, घरेलू रिटेल महंगाई पर पड़ता रहेगा।”

कंजम्प्शन डिमांड घटने की आशंका

बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज के इन-हाउस इकोनॉमिस्ट्स ने कहा कि अनुमान में सबसे बड़ा जोखिम कमजोर कंजम्प्शन डिमांड है जो पिछले कुछ वर्षों में ग्रोथ की मुख्य वजह रही है।

महंगाई और मॉनिटरी पॉलिसी के सामान्य होने के कंजम्प्शन डिमांड के लिए गिरावट के सबसे बड़े जोखिम के रूप में उल्लेख करते हुए, इकोनॉमिस्ट्स ने कहा कि आरबीआई के वित्त वर्ष 23 में रेपो रेट में 100 बीपीएस की बढ़ोतरी का अनुमान है, जिससे उन्हें नरम मॉनिटरी पॉलिसी का दौर खत्म होने के साथ कंजम्प्शन डिमांड के पटरी से उतरने का डर है। उन्होंने कहा, मॉनिटरी पॉलिसी के नॉर्मलाइजेशन की शुरुआत होने से लेंडिंग रेट्स में बढ़ोतरी होने का अनुमान है, जिससे कंजम्प्शन डिमांड में खासी गिरावट आ सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, साउदर्न ऑसिलेशन इंडेक्स के ला नीना मोड में होने से अगले साल कमजोर मॉनसून का एक अन्य रिस्क होने का अनुमान है। हालांकि लगातार तीसरा अच्छा मॉनसून एग्री ग्रोथ और संभावित ग्रामीण डिमांड के लिए अच्छा संकेत है।

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इंटरेस्ट रेट में 100 बीपीएस की बढ़ोतरी कर सकता है आरबीआई

मॉनिटरी पॉलिसी के संबंध में बीओएफए को वित्त वर्ष 23 में रेपो रेट में 100 बीपीएस की बढ़ोतरी का अनुमान है- पहली 20 बीपीएस की बढ़ोतरी फरवरी, 2022 में और फिर जून में रेपो रेट में बढ़ोतरी हो सकती है। अच्छी बात यह है कि बीओएफए को जीडीपी की तुलना में फिस्कल डेफिसिट सुधरकर 5.8 फीसदी होने का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष में 6.8 फीसदी है, वहीं करंट अकाउंट डेफिसिट 2 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है।

ब्रोकरेज को ग्लोबल ग्रोथ के 2022 में 4.3 फीसदी के साथ मजबूत बने रहने का अनुमान है, जिसमें 4.4 फीसदी ग्रोथ के साथ अमेरिका अगुआई करेगा और चीन की ग्रोथ खासी कम 4 फीसदी रहने का अनुमान है।

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