भारत सरकार अगले वित्त वर्ष में फूड, फर्टिलाइजर और रसोई गैस से जुड़ी सब्सिडी पर 4.1 लाख करोड़ रुपये (47.41 अरब डॉलर) खर्च कर सकती है। एक सरकारी सूत्र ने बताया कि फूड और एनर्जी कॉस्ट को कवर करने के लिए सालाना 8 पर्सेंट की बढ़ोतरी मुमकिन है। सुस्त जीडीपी ग्रोथ और बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी।
अर्थव्यवस्था में हालिया सुस्ती की मुख्य वजह शहरी क्षेत्रों और कंपनियों के निवेश में आई गिरावट है। हालांकि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सब्सिडी का बड़ा हिस्सा होता है और इसके जरिये अर्थव्यवस्था को बनाए रखना अहम चुनौती होगी। एक सबूसरकार का अनुमान है कि अगले फिस्कल ईयर के दौरान फूड सब्सिडी बिल में तकरीबन 5 पर्सेंट की बढ़ोतरी हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, यह आंकड़ा 2.15 लाख करोड़ रुपये (24.86 अरब डॉलर) हो सकता है।
सूत्रों ने बताया कि किसानों से ऊंची कीमत पर खरीदारी और स्टोरेज कॉस्ट में बढ़ोतरी की वजह से अगले साल की फूड सब्सिडी में पिछले वित्त वर्ष के सालाना खर्च (557 अरब डॉलर) के मुकाबले बढ़ोतरी की संभावना है। एक दूसरे सूत्र ने बताया कि सरकार रसोई गैस के लिए तकरीबन 250 अरब रुपये का आवंटन कर सकती है, जबकि मौजूदा फिस्कल ईयर में यह आवंटन 119 अरब रुपये है।
एक तीसरे सूत्र ने बताया कि अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी मौजूदा लेवल (1.7 लाख करोड़ रुपये) के आसपास ही रहने का अनुमान है। फाइनेंस, फूड और फर्टिलाइजर मिनिस्ट्री ने ईमेल के जरिये सब्सिडी पर भेजे गए सवालों के जवाब नहीं दिए।