इंडिया 2026-27 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगा : CEA Anantha Nageswaran

Chief Economic Advisor V Anantha Nageswaran ने यह भी कहा कि इंडिया दूसरी उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है

अपडेटेड Jun 14, 2022 पर 5:39 PM
कोरोना की महामारी के चलते इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ पर खराब असर पड़ा है। उसके बाद यूक्रेन क्राइसिस ने बड़ी प्रॉब्लम पैदा की है।

इंडिया 2026-27 तक 5 लाख करोड़ डॉलर (Trillion) की इकोनॉमी बन जाएगा। यह अनुमान चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) V Anantha Nageswaran ने व्यक्त किया है। उन्होंने यह भी कहा कि 2033-34 तक इंडिया की इकोनॉमी 10 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी।

CEA ने UNDP India के एक प्रोग्राम में कहा, "अभी हमारी इकोनॉमी 3.3 लाख करोड़ डॉलर की है। ऐसे में यह टारगेट (5 लाख करोड़ डॉलर) ज्यादा मुश्किल नहीं दिखता। अगर हम डॉलर में 10 फीसदी नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ मान कर चलें तो 2033-34 तक आप 10 लाख डॉलर (ट्रिलियन) तक पहुंच जाते हैं।"

नागेश्वरन ने यह भी कहा कि इंडिया दूसरी उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में इंडिया को 2024-25 तक 5 लाख करोड़ की इकोनॉमी और ग्लोबल पावरहाउस बनाने का लक्ष्य तय किया था। इससे पहले नागेश्वरन ने कहा था कि कोरोना क्राइसिस से बाहर आने में इंडिया ने अनुकरणीय रिकवरी दिखाई है।


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पिछले हफ्ते CEA ने कहा था कि इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) 2040 तक 20 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी। उन्होंने कहा था कि पांच साल में 5 लाख करोड़ डॉलर की होने के बाद अगर हर 7 साल में जीडीपी दोगुनी होती है तो यह दो दशक में 20 लाख करोड़ डॉल की हो जाएगी। अभी करेंट प्राइसेज पर इंडियन इकोनॉमी 3 लाख करोड़ डॉलर से थोड़ी ज्यादा है।

कोरोना की महामारी के चलते इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ पर खराब असर पड़ा है। उसके बाद यूक्रेन क्राइसिस ने बड़ी प्रॉब्लम पैदा की है। इसके चलते कमोडिटी की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। इसका असर इकोनॉमी की ग्रोथ पर भी पड़ा है।

हालांकि, इकोनॉमी धीरे-धीरे क्राइसिस से बाहर आ रही है। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने कहा है कि कंपनियों की बैलेंसशीट में सुधार आ रहा है। हालांकि, इकोनॉमिक रिफॉर्म्स की सरकार की कोशिशों पर कोरोना की महामारी का असर पड़ा है।

RBI ने बुधवार (8 जून) को फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में इकोनॉमी की ग्रोथ रेट 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। दरअसल, RBI ने ग्रोथ के अपने पहले के अनुमान को बरकरार रखा। RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि अप्रैल और मई के डेटा से पता चलता है कि इंडिया की इकोनॉमिक ग्रोथ मजबूत बनी हुई है।

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ 16.2 फीसदी रहेगी। दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर के दौरान जीडीपी की ग्रोथ 6.2 फीसदी रह सकती है। तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर के दौरान जीडीपी के 4.1 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। अंतिम तिमाही यानी जनवरी से मार्च के दौरान इकोनॉमी की ग्रोथ 4 फीसदी रह सकती है।

उधर, World Bank ने इस फाइनेंशियल ईयर में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। पहले उसने इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ 8.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। इसका मतलब है कि वर्ल्ड बैंक ने ग्रोथ का अनुमान 1.2 फीसदी घटा दिया है।

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