वित्त वर्ष 2022 में अभी तक भारत 300 अरब डॉलर से अधिक का एक्सपोर्ट कर चुका है। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने अब वित्त वर्ष 2022 के अंत तक 400 अरब डॉलर के महत्वकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के कई योजनाओं और कदमों पर जोर देना शुरू किया है। इन कदमों का खासतौर से एक्सपोर्ट आय को अधिकतम करने और कई अहम विदेशी मार्केट में दबदबा बढ़ाने को ध्यान में रखकर चुना गया है।
इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि वित्त वर्ष 2022 की आखिरी तिमाही में एक जिला एक निर्यात योजना, अफ्रीकी देशों में प्रोजेक्ट एक्सपोर्ट को बढ़ाना और ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान जैसे कदमों को कॉमर्स डिपार्टमेंट की तरफ प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इन कदमों पर योजनाओं पर तेजी लाने के आदेश मंत्रालय की तरफ से भेजे जा चुके हैं।
कोरोना महामारी के चलते गिरावट आने के बाद, पिछले 12 महीनों से भारत के निर्यात में लगातर बढ़ोतरी जारी है। वित्त वर्ष 2021-22 की अप्रैल से नवंबर अवधि के दौरान मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट ने 263.5 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 51.3 प्रतिशत अधिक है। यह 2019 की इसी अवधि के मुकाबले भी 24.8 प्रतिशत अधिक है, जब कोरोना महामारी अभी नहीं आई थी। कॉमर्स डिपार्टमेंट का लक्ष्य एक्सपोर्ट में आई इसी तेजी को बरकरार रखना है।
दिसंबर में 37% बढ़ा निर्यात
दिसंबर 2021 में देश का एक्सपोर्ट 37 फीसदी बढ़कर 37.29 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह किसी एक महीने में एक्सपोर्ट का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। कॉमर्स मिनिस्ट्री की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष (2021-22) के पहले नौ माह (अप्रैल-दिसंबर) में एक्सपोर्ट 300 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। इस दौरान कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल उम्मीद जताई कि देश का वस्तुओं का निर्यात मौजूदा वित्त वर्ष में 400 अरब डॉलर से ऊपर जाएगा।
आर्थिक ग्रोथ को बढ़ावा देने और एक्सपोर्ट के उत्पादों में विविधता लाने के लिए सरकार ने अब जिला स्तर पर फोकस करना शुरू किया है। साल 2020 में शुरू हुई "एक जिला एक निर्यात योजना" के तहत कुछ ऐसे उत्पादों की पहचान की गई है, जिनके निर्यात की काफी संभावना है। इस योजना के तहत सरकार देश के करीब 450 जिलों में एक ऐसा उत्पाद चिह्नित करने का प्रयास कर रही है जो पारंपरिक रूप से वहां बनता आया है और जिसे वित्तीय, तकनीकी और मार्केटिंग सहायता मुहैया कराकर बड़े पैमाने पर निर्यात किया जा सकता है।