ग्रीन पोर्टफोलियो के फाउंडर दिव्यम शर्मा ने कहा कि निफ्टी में 5-15 फीसदी तक की गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि घटनाक्रमों को देखते हुए निवेशकों को लीवरेज नहीं करना चाहिए। इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट में 15 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले शर्मा ने कहा, आरबीआई (RBI) के अपनी नीति में नरम रुख से हटने से बाजार में गिरावट देखने को मिलेगी और मार्केट में रिटेल इन्वेस्टर्स की तरफ से इनफ्लो पर असर पड़ सकता है।
महंगाई, ब्याज दरों में बढ़ोतरी का वैल्युएशन पर होगा असर
मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मार्केट के लिए मुख्य रूप से सकारात्मक बात लिक्विडिटी है और यह 2022 में ग्रोथ की गति प्रभावित कर सकती है। भारत सहित इमर्जिंग मार्केट में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स से लिक्विडिटी में कमी है। इन्वेस्टर्स को अब इक्विटी में निवेश करते समय महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी का वैल्युएशन और उपक्रमों पर पड़ने वाला असर देखना चाहिए।
बाजार पर शॉर्ट टर्म में पड़ सकता है दबाव
ग्रीन पोर्टफोलियो के फाउंडर ने कहा, इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की योजना के साथ हमें उम्मीद है कि पी/ई (प्राइस-टू-अर्निंग्स) में बढ़ोतरी पर अब रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा, ओमीक्रोन का डर, महंगाई में बढ़ोतरी, डॉलर में मजबूती, ब्याज दरों में बढ़ोतरी से बाजारों पर शॉर्ट टर्म दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां मार्जिन पर ज्यादा असर के बिना आंकड़ों में ग्रोथ दिखाने में किस तरह सक्षम होंगी।
सीपीआई रिटेल इनफ्लेशन 5 फीसदी से ऊपर रहने का अनुमान
महंगाई के संबंध में शर्मा ने कहा, नवंबर में सीपीआई रिटेल इनफ्लेशन के आंकड़े 5 फीसदी से ऊपर रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि नवंबर में ब्रेंट क्रूड की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर थीं। अमेरिका में, सीपीआई का आंकड़ा 4 दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। महंगाई के इस स्तर के चलते ब्याज दरों में अनुमान से ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है और इससे इक्विटीज में 5-15 फीसदी तक गिरावट आ सकती है।