इस फाइनेंशियल ईयर में 1.62 लाख करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉनेटाइज कर सकती है सरकार। सरकार ने सोमवार को संसद में यह जानकारी दी। सरकार ने पिछले साल 6 लाख करोड़ रुपये के नेशनल मॉनेटाइजेश पाइपलाइन (NMP) का ऐलान किया था। यहां मॉनेटाइजेशन का मतलब सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल से पैसे कमाने से है। इस प्रोसेस में प्राइवेट सेक्टर को भी शामिल किया जाता है।
NMP का मकसद अलग-अलग सेक्टर की सरकारी संपत्तियों की असल वैल्यू बाहर लाना है। इनमें पावर, सड़क और रेलवे सहित कई सेक्टर शामिल हैं। इसके लिए चार साल यानी 2025 तक की समयसीमा तय की गई है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को एक सवाल के एक लिखित जवाब में लोकसभा को बताया कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान करीब 97,000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी संपत्तियों को मॉनेटाइज किया गया।
मॉनेटाइज किए गए एसेट्स में पीपीपी कनसेशन पर आधारित हाईवे टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (ToT), NHAI का इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT), पावरग्रिड इनविट, फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में मिनरल और कोल ब्लॉक से एनुअल एक्रुअल , रेलवे कॉलोनी के रिडेवलपमेंट में प्राइवेट इनवेस्टमेंट, पीपीपी मोड पर 6 एयरपोर्ट की लीजिंग और पीपीपी मोड पर पोर्ट टर्मिनल्स बिड में प्राइवेट इनवेस्टमेंट शामिल है।
उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के दौरान एनएमपी के तहत जिन एसेट्स के मॉनेटाइजेशन का प्लान है, उसकी सांकेतिक वैल्यू 1,62,422 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि इस फाइनेंशियल ईयर में जिन ट्रांजेक्शन का प्रस्ताव है, उनमें हाईवे टीओटी बंडल्स औ इनविट के फ्यूचर राउंड्स शामिल हैं।
उपर्युक्त के अलावा स्पोर्ट्स स्टेडियम का रिडेवलपमेंट, ऑपरेशनल पावर जेनरेशन एंड ट्रांसमिशन एसेट्स, पीपीपी के जरिए एयरपोर्ट्स की लीजिंग, सिलोस और वेयरहाउस का डेवलपमेंट, टावर और माइनिंग एसेट्स के मॉनेटाइजेशन शामिल हैं।
सांकेतिक वैल्यू का मतलब उस वैल्यू से जो मॉनेटाइजेशन के प्रोसेस में एसेट ओनर्स से मिलने की संभावना है। यह एक्रुअल या प्राइवेट सेक्टर के इनवेस्टमेंट के रूप में हो सकता है। एनएमपी के तहत जिन सेक्टर की पहचान की गई है, उनमें पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, पावर जेनरेशन, ट्रांसमिशन, माइनिंग, टेलीकॉम, स्टेडियम और अर्बन रियल एस्टेट शामिल हैं।