जून तिमाही में शानदार जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) में बेस इफेक्ट का हाथ रहा। इसे इकोनॉमी में आ रही रिकवरी से भी मदद मिली। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने 31 अगस्त को जून तिमाही के जीडीपी के डेटा जारी किए। इस दौरान जीडीपी की ग्रोथ 13.5 फीसदी रही। यह जनवरी-मार्च की 4.1 फीसदी ग्रोथ के मुकाबले बहुत ज्यादा है।
जून तिमाही की जीडीपी ग्रोथ पिछली चार तिमाहियों में सबसे ज्यादा रही। लेकिन, यह इकोनॉमिस्ट्स और RBI के अनुमान से कम रही। RBI ने जीडीपी ग्रोथ पहली तिमाही में 16.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। इकोनॉमिस्ट्स को ग्रोथ 15 फीसदी रहने की उम्मीद थी।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज में लीड इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा, "जीडीपी ग्रोथ के बेहतर आंकड़ों में सर्विस सेक्टर का बड़ा हाथ है। प्राइवेट एक्सपेंडिचर बढ़ने का असर भी इस पर पड़ा है।" जून तिमाही में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 17.6 फीसदी रही, जबकि इंडस्ट्री की ग्रोथ 8.6 फीसदी रही।
CRISIL के चीफ इकोनॉमिस्ट डीके जोशी ने कहा, "प्राइवेट कंजम्प्शन बढ़ रहा है। शहरी इलाकों में डिमांड को कॉन्टैक्ट-इनटेंसिव सर्विसेज का सपोर्ट मिल रहा है। अगर इनफ्लेशन हाई नहीं होता और रूरल डिमांड कमजोर नहीं होती तो प्राइवेट कंजम्प्शन और तेजी से बढ़ता।"
इस दौरान इनवेस्टमेंट भी बढ़ा है। ग्रॉस कैपिटल फॉर्मेशन की ग्रोथ 20.1 फीसदी रही। इस बीच, सरकार का कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सिर्फ 1.3 फीसदी बढ़ा। कोरोना की पहली लहर के दौरान सरकार के खर्च बढ़ाने से इकोनॉमी की बहुत सपोर्ट मिला था।
इंडिया का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट बढ़ने का असर नेट एक्सपोर्ट्स पर पड़ा, जिसे जीडीपी का चौथा कंपोनेंट माना जाता है। नेट एक्सपोर्ट्स एक साल पहले की पहली तिमाही के मुकाबले बढ़कर अप्रैल-जून में निगेटिव 2.98 लाख करोड़ रुपये रहा।
नोमुरा के ओरोदीप नंदी ने जून तिमाही की ग्रोथ को बेहतर बताया। लेकिन कहा कि आने वाली तिमाहियों में ग्रोथ में कमी देखने को मिल सकती है। जून तिमाही के आंकड़ों के बाद आरबीआई पूरे साल के लिए ग्रोथ के 7.2 फीसदी के अपने अनुमान में कमी कर सकता है।
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इकोनॉमिस्ट निखिल गुप्ता ने कहा, "पहती तिमाही के ग्रोथ के आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि आरबीआई ग्रोथ के 7.2 फीसदी के अपने पहले के अनुमान को घटाकर 6.7 फीसदी कर सकता है।"