ग्लोबल इकोनॉमी पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। खासतौर से कोरोना वायरस के ओमीक्रोन वेरिएंट के चलते दुनिया भर में रोकथाम को लेकर लगाए जा रहे उपायों के चलते यह अनिश्चितता और बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार 15 दिसंबर को जारी एक बुलेटिन में कहा।
RBI ने कहा कि हालांकि इस बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्तवर्ष 2022 की दूसरी तिमाही में जोरदार वापसी की है। ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) ने कोरोना-पूर्व के अपने स्तर को पार कर लिया है और महंगाई (मुद्रास्फीति) मोटे तौर पर अपने अनुमानों के मुताबिक है।
RBI ने बुलेटिन में कहा, "अर्थव्यवस्था से जुड़े कई संकेतक सकारात्मक दिख रहे हैं और उपभोक्ताओं का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है। यह बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था टिकाऊ राह पर है।" बुलेटिन में कहा गया है कि घरेलू स्तर पर कोविड महामारी के मोर्चे पर कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं।
RBI बुलेटिन के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था खुद को वैश्विक हालात से साफतौर पर अलग करती जा रही है। ग्लोबल इकोनॉमी जहां सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों, बढ़ती महंगाई और कई देशों में फिर से कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ने से बेहाल है। वहीं भारतीय अर्थव्यस्था इसके ठीक विपरीत टिकाऊ सुधार की राहत पर है।
RBI ने कहा कि अनलॉक की प्रक्रिया तेज होने के साथ अब आवाजाही तेजी से बढ़ रही है और नौकरियों का बाजार फिर से सज रहा है। इसे व्यापक तौर पर आर्थिक गतिविधियां मजबूती की राह पर हैं। बुलिटेन में कहा गया है, "नवंबर-दिसंबर के दौरान प्राइवेट निवेश बढ़ने, बैंकों से कर्ज लेने में बढ़ोतरी और सरकारों (केंद्र और राज्य) की तरफ से कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ने से इकोनॉमी में सुधार हुआ है।"
कैपिटल मार्केट को लेकर RBI बुलेटिन में कहा गया है कि भारतीय शेयर बाजार ने इस साल अब तक तमाम बड़े सूचकांकों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि बाजार में हुए जोरदार फायदे ने वैल्यूएशन को भी हद से ज्यादा बढ़ा दिया है। इसकी वजह से ग्लोबल फाइनेंशियल फर्में थोड़ी सजग हो गई हैं।
RBI ने इस बुलेटिन में यह साफ किया है कि इसमें व्यक्त विचार लेखकों के हैं, उसके विचारों का अनिवार्य तौर पर प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।