GST Compensation: राज्यों को मुआवजा देने को लिए गए कर्ज को समय से पहले चुका सकता है केंद्र

GST: अधिकारी ने कहा कि अगस्त में जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है। गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने के बाद राज्यों के राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए मुआवजा उपकर को शुरू में पांच साल के लिए लाया गया था

अपडेटेड Jun 23, 2024 पर 3:15 PM
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केंद्र सरकार गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) क्षतिपूर्ति के तहत राज्यों को मुआवजा देने को लिए गए कर्ज का समय से पहले भुगतान कर सकती है।

केंद्र सरकार गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) क्षतिपूर्ति के तहत राज्यों को मुआवजा देने को लिए गए कर्ज का समय से पहले भुगतान कर सकती है। एक अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र ने वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 में जीएसटी राजस्व क्षतिपूर्ति के लिए राज्यों को मुआवजा देने को 2.69 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। उन्होंने बताया कि कर्ज को तय समय से चार महीने पहले नवंबर 2025 तक चुकाया जा सकता है। बाजार से लिए गए कर्ज का पूरा भुगतान मार्च 2026 तक किया जाना था।

GST काउंसिल की अगली बैठक में हो सकती है चर्चा

अधिकारी ने कहा कि अगस्त में जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है। गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने के बाद राज्यों के राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए मुआवजा उपकर को शुरू में पांच साल के लिए लाया गया था। कंपनसेशन सेस जून 2022 में खत्म हो गया, लेकिन लेवी के जरिये जमा की गई राशि का उपयोग केंद्र द्वारा कोविड-19 के दौरान उधार लिए गए 2.69 लाख करोड़ रुपये के ब्याज और मूलधन को चुकाने के लिए किया जा रहा है।


जीएसटी काउंसिल की 53वीं बैठक में शनिवार को कर्नाटक ने कंपनसेशन सेस लगाने, ऋण राशि के पुनर्भुगतान और आगे की व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा उठाया था। अधिकारी ने कहा कि राज्यों को बता दिया गया है कि ऋण राशि का भुगतान जल्दी किया जा सकता है। मार्च 2026 के बजाय नवंबर 2025 तक ऐसा हो सकता है। इसलिए नवंबर 2025 से आगे उपकर राशि का बंटवारा कैसे किया जाएगा, इस सब पर अगली काउंसिल की बैठक में चर्चा की जाएगी।

1 जुलाई 2017 को लागू हुआ था GST

जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था और राज्यों को जीएसटी लागू होने के कारण होने वाले रेवेन्यू लॉस की भरपाई जून 2022 तक करने का भरोसा दिया गया था। हालांकि जीएसटी के बाद राज्यों के प्रोटेक्टेड रेवेन्यू में 14 परसेंट की कंपाउंडेड ग्रोथ हुई, लेकिन सेस कलेक्शन उसी अनुपात में नहीं बढ़ा। कोविड-19 ने प्रोटेक्टेड रेवेन्यू और एक्चुअल रेवेन्यू प्राप्ति के बीच के अंतर को और बढ़ा दिया, जिसमें सेस कलेक्शन में कमी भी शामिल है।

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