31 दिसंबर को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों से पता चला है कि देश का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) सितंबर तिमाही में 9.6 अरब डॉलर रहा, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1.3 प्रतिशत है। हाइअर मर्चेंडाइज इंपोर्ट बिल के कारण देश का करंट अकाउंट घाटा में आया है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को बताया कि करंट अकाउंट चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही और जून-सितंबर 2020 की तिमाही दोनों में सरप्लस की स्थिति में था।
देश का करंट अकाउंट अप्रैल-जून 2021 में 6.6 अरब डॉलर सरप्ल की स्थिति में था, जो GDP का 0.9 प्रतिशत था। जबकि एक साल पहले सितंबर तिमाही में करंट अकाउंट 15.3 अरब डॉलर यानी GDP का 2.4 प्रतिशत सरप्ल था।
करंट अकाउंट में गुड्स और सर्विस के इंपोर्ट और एक्सपोर्ट वैल्यू के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रांसफर्ड कैपिटल भी शामिल होती है।
RBI के आंकड़े के अनुसार मुख्य रूप से व्यापार घाटा बढ़ने से CAD बढ़ा है। व्यापार घाटा सितंबर तिमाही में बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो इससे पहले अप्रैल-जून, 2021 तिमाही में 30.7 अरब डॉलर था। इसके अलावा निवेश आय की निकासी का भी असर करंट अकाउंट पर पड़ा है।
क्वार्टर अंडर रिव्यू में नेट सर्विस रिसेप्ट अप्रैल-जून तिमाही की तुलना में मामूली रूप से घटी, लेकिन सालाना आधार पर यह बढ़ी है।