जून तिमाही के जीडीपी डेटा के बाद मूडीज ने इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ का अनुमान घटाया

मूडीज की रिपोर्ट में आने वाले समय में इनफ्लेशन में कमी आने का अनुमान जताया गया है। इसमें कहा गया है कि इस साल की दूसरी छमाही में इनफ्लेशन के दबाव में कमी आएगी

अपडेटेड Sep 01, 2022 पर 1:22 PM
मूडीज ने कहा कि इनफ्लेशन अब भी एक चैलेंज बना हुआ है। हालांकि RBI ग्रोथ और इनफ्लेशन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

सरकार ने 31 अगस्त को जून तिमाही की जीडीपी ग्रोथ का डेटा पेश किया। इस दौरान जीडीपी ग्रोथ 13.5 फीसदी रही। RBI ने जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 16 फीसदी से ज्यादा रहने का अनुमान जताया था। इकोनॉमिस्ट्स का भी कहना था कि जीडीपी ग्रोथ 15 फीसदी रहेगी। जीडीपी ग्रोथ अनुमान से कम रहने के अगले ही दिन मूडीज ने इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ के अपने अनुमान को घटा दिया है।

Moody's Investors Service ने कैलेंडर ईयर 2022 (CY22) में इंडिया की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) का अनुमान घटाकर 7.7 फीसदी कर दिया है। उसने अगले कैलेंडर ईयर (CY23) की ग्रोथ के अनुमान को भी घटाया है।

मूडीज ने 1 सितंबर (गुरुवार) को ग्रोथ के अपने अनुमान में कमी की। मई में मूडीज ने 2022 में इंडिया की इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) के अनुमान को 9.1 से घटाकर 8.8 फीसदी कर दिया था।


मूडीज ने गुरुवार को कहा कि इंडिया की जीडीपी की ग्रोथ साल 2022 में 8.8 फीसदी की जगह 7.7 फीसदी रह सकती है। उसने अगले साल के बारे में कहा कि जीडीपी की ग्रोथ 5.4 फीसदी की जगह 5.2 फीसदी रह सकती है। कैलेंडर ईयर का मतलब जनवरी से दिसंबर की अवधि से है।

मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "हमारा मानना है कि इंडिया की रियल जीडीपी ग्रोथ साल 2021 के 8.3 फीसदी के मुकाबले साल 2022 में 7.7 फीसदी रहेगी। यह साल 2023 में और घटकर 5.2 फीसदी रह जाएगी। इसकी वजह इंटरेस्ट रेट में वृद्धि, मानसून का असमान बारिश और ग्लोबल ग्रोथ में सुस्ती है।"

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उसने कहा है कि इनफ्लेशन एक चैलेंज बना हुआ है। RBI ग्रोथ और इनफ्लेशन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। वह इंपोर्टेड इनफ्लेशन के असर से भी निपटने की कोशिश कर रहा है। इसकी वजह यह है कि इस साल डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 7 फीसदी गिर चुका है।

मूडीज की रिपोर्ट में कहा गया है, "इंडियन इकोनॉमी के हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में हालात में व्यापक सुधार हुआ है। सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। पीएमआई, कैपसिटी यूटिलाइजेशन, मोबिलिटी, टैक्स फाइलिंग और कलेक्शन और कंपनियों की कमाई में सुधार आया है।"

हालांकि, मूडीज की रिपोर्ट में आने वाले समय में इनफ्लेशन में कमी आने का अनुमान जताया गया है। इसमें कहा गया है कि इस साल की दूसरी छमाही में इनफ्लेशन के दबाव में कमी आएगी। अगले साल यह दबाव और घट जाएगा।

मूडीज ने कहा है, "कमोडिटी की ग्लोबल कीमतों में जल्द नरमी आने से ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। अगर कैपिटल एक्सपेंडिचर साइकिल मजबूत बनी रहती है तो इकोनॉमिक ग्रोथ साल के 2023 के हमारे अनुमान से ज्यादा रह सकता है।"

सरकार ने इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में (अप्रैल-जून) जीडीपी ग्रोथ के डेटा पेश किए। इस दौरान जीडीपी ग्रोथ 13.5 फीसदी रही। यह पिछली चार तिमाही में सबसे ज्यादा है। लेकिन, इकोनॉमिस्ट्स और आरबीआई के अनुमान के मुकाबले कम है। इकोनॉमिस्ट्स ने पहली तिमाही में ग्रोथ 15 फीसदी रहने का अनुमान जताया था, जबकि केंद्रीय बैंक ने ग्रोथ 16 फीसदी से ज्यादा रहने की उम्मीद जताई थी।

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