भारत में करवट ले रही है एक बड़ी तेजी, दुनिया का नेतृत्व करने के लिए है तैयार

भारत में परिवार, किसी और जगह की तुलना में ज्यादा डिजिटल सेवी हैं। हर कोई स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है, फिर चाहे वह पर्सनल यूज के लिए हो या फिर व्यवसाय चलाने के लिए। नई-क्रेडिट लेने वाली आबादी तेजी से बढ़ रही है। इन्फ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है। आगे बढ़ने, सफल होने और कड़ी मेहनत करने की इच्छा हर जगह दिखाई दे रही है

अपडेटेड Oct 08, 2023 पर 9:27 AM
आज भारत की जीडीपी 3.5 लाख करोड़ डॉलर है।

भारत (Indian Economy) में बड़ी तेजी आने की राह देख रही है। मौजूदा वक्त में सभी वैश्विक बाजार सॉवरेन डेट संकट से जूझ रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में इन्फ्रास्ट्रक्चर चरमरा रहा है। सरकार में कहीं कोई लीडर नहीं है। केंद्रीय बैंकों से पैसा लगातार निकाला जा रहा है। उपभोक्ता तनाव महसूस कर रहे हैं। लेकिन भारत इन सब से बचा हुआ है। भारत अब इतना सक्षम है कि विश्व का नेतृत्व कर सकता है। यह कहना है मार्केट एक्सपर्ट अश्विनी माथुर का। माथुर ने अपनी एक पोस्ट में लिखा है कि आज भारत की GDP (Gross Domestic Product) 3.5 लाख करोड़ डॉलर है। भारत ने यह GDP तुरंत हासिल नहीं कर ली है।

इस लेवल पर देश को पहुंचने में एक लंबा वक्त लगा है। लेकिन कंपाउंडिंग की ताकत के कारण और भारत के पहले से इतना ग्रो कर लेने के कारण GDP के दोगुना होकर 7 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने में एक दशक से भी कम समय लगेगा।

स्टॉक रिटर्न और GDP वृद्धि


माथुर के मुताबिक, इक्विटी रिटर्न में CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) की सबसे तेज अवधि तब होती है, जब किसी देश की GDP लगभग 3 लाख करोड़ डॉलर से दोगुनी हो जाती है। इस दावे को सपोर्ट करने वाली कई रिसर्च हैं। उदाहरण के लिए 1982 में अमेरिका की GDP 3 लाख करोड़ डॉलर थी। 2000 में, यह 10 लाख करोड़ डॉलर थी। हम सभी जानते हैं कि अगले दो दशकों में इक्विटी रिटर्न का क्या हुआ। अमेरिकी इक्विटी इंडेक्स 10 गुना बढ़ गए। अब अगला बड़ा उदाहरण भारत बनने वाला है। भारत के बुनियादी सिद्धांत आज के अमेरिका के साथ-साथ 1982 के अमेरिका से भी कहीं बेहतर हैं।

यहां एक और आंकड़ा बड़ा ही दिलचस्प और गौर करने वाला है। 1982 में अमेरिका में हाउसहोल्ड डेट, GDP का 45 प्रतिशत था। आज यह GDP का 65 प्रतिशत है। यूके में हाउसहोल्ड डेट GDP का 88 प्रतिशत, जापान में 68 प्रतिशत और चीन में 64 प्रतिशत है। जहां तक भारत की बात है तो वर्तमान में भारत का हाउसहोल्ड डेट GDP का 14 प्रतिशत है। 3.5 लाख करोड़ डॉलर की GDP के साथ, इसके बढ़ने की गुंजाइश बहुत अधिक है। कहा जा सकता है कि भारत के विकास के सबसे अच्छे दिन आने वाले हैं।

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क्या भारत विश्व को संकट से बाहर निकाल सकता है?

माथुर के मुताबिक, भारत में परिवार, किसी और जगह की तुलना में ज्यादा डिजिटल सेवी हैं। हर कोई स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है, फिर चाहे वह पर्सनल यूज के लिए हो या फिर व्यवसाय चलाने के लिए। नई-क्रेडिट लेने वाली आबादी तेजी से बढ़ रही है। इन्फ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है। आगे बढ़ने, सफल होने और कड़ी मेहनत करने की इच्छा हर जगह दिखाई दे रही है।

क्या भारत विश्व को संकट से बाहर निकाल सकता है? इस सवाल का जवाब है क्यों नहीं। इतिहास में झांकें तो ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय तटों पर आने से पहले, वैश्विक GDP का 45 प्रतिशत भारत से आता था। आज के वक्त में वैश्विक GDP में भारत की हिस्सेदारी दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से की तुलना में तेजी से बढ़ने वाली है। और स्टॉक रिटर्न से यह सबके सामने आएगा।

बजाज फाइनेंस हो सकती है अगला Apple

माथुर का मानना है कि भारत की बजाज फाइनेंस, अगली Apple साबित हो सकती है। इसे समझने के लिए Apple की कहानी थोड़ी सी जाननी होगी। Apple को 1980 में सूचीबद्ध किया गया था। अपनी लिस्टिंग के बाद पहले बीस वर्षों तक, इसने शेयरधारकों को कोई रिटर्न नहीं दिया। 1992 में इसका मार्केट कैप 5.2 अरब डॉलर था और 2002 में मार्केट कैप 4.2 अरब डॉलर था। एप्पल को अच्छे से एस्टेबिलिश होने में 22 साल लग गए। उन 22 वर्षों में यह कहीं नहीं पहुंची। लेकिन फिर वक्त बदला और आज Apple कहां है, यह किसी से छिपा नहीं है। Apple को ट्रिलियन-डॉलर कंपनी बनने में 38 साल लग गए। उसके बाद दो वर्षों के अंदर यह 2 ट्रिलियन (अगस्त 2020 में) डॉलर की कंपनी थी। इसके बाद 3 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बनने में इसे सिर्फ दो साल लगे।

बजाज फाइनेंस की बात करें तो 20 वर्षों तक इसने ग्रो करने में समय लगाया। फिर 2012 के बाद से Apple की तरह, यह भी एक तेज ग्रोथ की राह पर है। इसका मौजूदा बाजार 59 अरब डॉलर का है। इस दशक के अंत तक, इसे इस स्तर से 10 गुना ऊपर जाना चाहिए। स्टॉक भारतीय शेयर बाजारों में एक नए उच्च स्तर पर है।

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