चीन की इकोनॉमी को ध्वस्त करने का भारत ने बनाया प्लान, जानिए कैसे चीन से फैक्ट्रियां भारत लाई जाएंगी

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी में न सिर्फ सस्ता श्रम उपलब्ध है बल्कि यहां अंग्रेजी बोलने वाले एंप्लॉयीज का टैलैंट पूल भी है। लेकिन, इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत अच्छा नहीं होने से विदेशी कंपनियां इंडिया में इनवेस्ट करने से कतराती हैं

अपडेटेड Oct 03, 2022 पर 2:36 PM
अभी 1,300 प्रोजेक्ट्स गतिशक्ति पोर्टल की निगरानी में हैं। इनमें से करीब 40 फीसदी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा नहीं किया जा सका है।

इंडिया में करीब आधे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (Infrastructure Projects) को तय समय में पूरा नहीं किया जा सका है। हर चार में से एक प्रोजेक्ट का खर्च तय बजट को पार कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का मानना है कि इस तरह के प्रॉब्लम को दूर करने में टेक्नोलॉजी मददगार हो सकती है। इसके लिए पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) के तहत 100 ट्रिलियन रुपये के मेगा प्रोजेक्ट के लिए सरकार एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बना रही है। इस प्लेटफॉर्म से 16 मिनिस्ट्रीज जुड़ी होंगी।

इस प्लेटफॉर्म (पोर्टल) पर इनवेस्टर्स और कंपनियों को प्रोजेक्ट के डिजाइन, एप्रूवल और अनुमानित कॉस्ट के लिए एक वन-स्टॉप सॉल्यूशन मिलेगा। मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में लॉजिस्टिक्स के स्पेशल सेक्रेटरी अमृत लाल मीणा ने कहा, "इसका मकसद प्रोजेक्ट को तय समय और निर्धारित बजट में पूरा करना है। हमारी नजरें उन ग्लोबल कंपनियों पर हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग के लिए इंडिया को अपना सेंटर बनाना चाहती हैं।"

project behind schedule


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प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने से इंडिया को काफी फायदा होगा। खासकर तब जब चीन बाहरी दुनिया के लिए करीब पूरी तरह से बंद है। इसलिए विदेशी कंपनियां चाइना-प्लस-वन पॉलिसी अपना रही हैं। वे अपने बिजनेस और सप्लाई चेन को डायवर्सिफाय करने के लिए दूसरे देशों में मौके तलाश रही हैं।

going over budget

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी में न सिर्फ सस्ता श्रम उपलब्ध है बल्कि यहां अंग्रेजी बोलने वाले एंप्लॉयीज का टैलैंट पूल भी है। लेकिन, इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत अच्छा नहीं होने से विदेशी कंपनियां इंडिया में इनवेस्ट करने से कतराती हैं।

Kearney India के पार्टनर अंशुमान सिन्हा ने कहा, "कई कंपनियां राजनीतिक कारणों की वजह से चीन से बाहर शिफ्ट होना चाहती हैं। लेकिन, चीन से मुकाबला के लिए हमें कॉस्ट के मामले में जितना हो सके उतना प्रतिस्पर्धी होना पड़ेगा। गतिशक्ति का मकसद देश के अंदर गुड्स और प्रोडक्ट्स के फ्लो को आसान बनाना है। "

सिन्हा ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत ऐसे नए प्रोडक्शन कलस्टर्स की पहचान करने पर फोकस है, जो अभी उपलब्ध नहीं हैं। फिर, इसे देश के रेलवे नेटवर्क, पोर्ट्स और एयरपोर्ट्स से लिंक किया जाएगा। अगर आप गतिशक्ति के परतों को देखें तो इसमें नोड्स की पहचान करने के साथ ही लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत बनाया जा रहा है।

इंडिया में टेक्नोलॉजी के जरिए लाल फीताशाही को खत्म करना बहुत जरूरी है। इससे प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। अभी 1,300 प्रोजेक्ट्स गतिशक्ति पोर्टल की निगरानी में हैं। इनमें से करीब 40 फीसदी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा नहीं किया जा सका है। इसके पीछे जमीन अधिग्रहण में देरी और वन और पर्यावरण से जुड़े क्लियरेंस बड़े मसले हैं।

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