रोजगार के मोर्चे पर खुशखबरी आई है। बेरोजगारी दर 6 साल के निचले स्तर पर खिसक गई है। इससे जुड़े आंकड़े 9 अक्टूबर को नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) ने जारी किया। इसने पीरियाडिक लेबर फोर्स सर्वे एनुअल रिपोर्ट 2022-23 में बताया कि जुलाई 2022 से जून 2023 के बीच बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) 3.2 फीसदी रही। 2021-22 में यह 4.1 फीसदी पर थी। यह बेरोजगारी दर 15 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोगों के काम-काज के हिसाब से मापा जाता है और इसे फीसदी में दिखाया जाता है कि लेबर फोर्स में 15 साल से अधिक के कितने लोगों के पास काम-धंधा नहीं है।
इसमें सर्वे की डेट से 365 दिन पहले के समय में रोजगार की स्थिति देखी जाती है। इस सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि पिछले 6 वर्षों में कामकाजी महिलाओं की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है।
6 साल के निचले स्तर पर बेरोजगारी दर
जल्द से जल्द एक नियमित समय अंतराल पर लेबर फोर्स डेटा के उपलब्धता की महत्ता को देखते हुए अप्रैल 20217 में NSSO ने पीरियाडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) लॉन्च किया। सोमवार 9 अक्टूबर को जो आंकड़े आए हैं, उसके मुताबिक जुलाई 2022-जून 2023 में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों के बीच बेरोजगारी दर 3.2 फीसदी रही। 2021-22 में यह 4.1 फीसदी पर थी। 2020-21 में 4.2 फीसदी, 2019-20 में 4.8 फीसदी, 2018-19 में 5.8 फीसदी और 2017-18 में 6 फीसदी पर थी। इसका मतलब हुआ कि इस बार 2022-23 में बेरोजगारी दर छह साल के निचले स्तर पर आ गई।
गांवों से लेकर शहरों में कम हुई बेरोजगारी
गांवों की बात करें तो बेरोजगारी दर 2017-18 में 5.3 फीसदी पर थी जो अब 2022-23 में 2.4 फीसदी पर आ गई। वहीं शहरों में यह इस दौरान 7.7 फीसदी से 5.4 फीसदी पर आ गई है। पुरुषों और महिलाओं की बात करें तो पुरुषों की बेरोजगारी दर इस दौरान 6.1 फीसदी से घटकर 3.3 फीसदी पर आ गई और महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 5.6 फीसदी से खिसकर 2.9 फीसदी पर आ गया है।
महिलाओं को भी तेजी से मिला रोजगार
लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) इस अवधि में 49.8 फीसदी से बढ़कर 57.9 फीसदी पर पहुंच गया। यह पार्टिसिपेशन रेट यह बताता है कि जनसंख्या का कितना फीसदी हिस्सा काम कर रहा है या काम की तलाश में है। गांवों में यह 2017-18 में 50.7 फीसदी से बढ़कर 60.8 फीसदी पर पहुंच गया और शहरों में 47.6 फीसदी से बढ़कर 50.4 फीसदी पर। पुरुषों में यह 75.8 फीसदी से 78.5 फीसदी और महिलाओं में 23.3 फीसदी से 37.0 फीसदी पर पहुंच गया। कुल जनसंख्या में काम कर रहे लोगों की संख्या यानी वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो (WPR) भी इस दौरान 46.8 फीसदी से 56 फीसदी पर पहुंच गई। गांवों में यह 48.1 फीसदी से 59.4 फीसदी, शहरों में 43.9 फीसदी से 47.7 फीसदी, पुरुषों में 71.2 फीसदी से 76 फीसदी और महिलाओं में 22 फीसदी से 35.9 फीसदी पर पहुंच गया।