Mumbai Coastal Road Project: कोस्टल रोड की लागत 8 साल में 405% बढ़ने पर CAG ने BMC से मांगा जवाब

6 जुलाई 2019 से 01 जनवरी 2020 के दौरान काम पूरी तरह से बंद होने के बावजूद इस अवधि के लिए ठेकेदारों को भुगतान किया गया

अपडेटेड Dec 04, 2021 पर 11:22 AM
मुंबई कोस्टल रोड प्रोजेक्ट- प्रतीकात्मक तस्वीर

मुंबई में एक सड़क परियोजना भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India's (CAG) की जांच के दायरे में आ गई है क्योंकि इसकी निर्माण लागत अत्यधिक बढ़ गई है। CAG ने मुंबई कोस्टल रोड प्रोजेक्ट (Mumbai Coastal Road Project (MCRP) के निर्माण लागत 2011 में ₹252 करोड़ से 2018 में ₹1,274 करोड़ तक 405% बेतहाशा बढ़ जाने की वजह से मुंबई की नगरपालिका (BMC) से सवाल किया है।

हिंदुस्तान टाइम्स के हवाले से लाइवमिंट ने खबर छापी है कि ऑडिटिंग बॉडी ने अप्रैल 2016 और मार्च 2020 के बीच एक निरीक्षण रिपोर्ट में ₹200 करोड़ के अलग-अलग खर्च पर भी सवाल उठाए हैं।

गौरतलब है कि 2010 में दक्षिण मुंबई में नरीमन पॉइंट और कांदिवली के बीच सुगम यातायात के लिए 35 किलोमीटर की तटीय सड़क (coastal road) की योजना बनाई गई थी। हालांकि अगले 8 वर्षों तक ये प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ। 2018 में बीएमसी (BMC) ने मरीन ड्राइव और वर्ली के पास प्रिंसेस स्ट्रीट फ्लाईओवर के बीच पहले चरण का निर्माण शुरू किया, जो मोटर चालकों को वर्ली-बांद्रा सी लिंक से होकर वर्सोवा तक ले जाएगा। चूंकि निर्माण अक्टूबर 2018 में शुरू हुआ था तो खर्च बढ़ गया था। लेकिन CAG ने अप्रैल 2016 से मार्च 2020 के बीच बीएमसी के कोस्टल रोड विभाग के खर्च की जांच की और उस पर सवाल उठाए हैं।


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CAG ने बताया कि कोस्टल रोड की लागत 2011 में ₹252 करोड़ प्रति किमी, 2016 में ₹304 करोड़ प्रति किमी, 2018 में ₹686 करोड़ प्रति किमी और अंत में ₹1,274 प्रति किलोमीटर हो गई।

बीएमसी ने इसके समर्थन में अपना स्पष्टीकरण पेश किया है जिस पर जांच होनी बाकी है।

सीएजी की रिपोर्ट में "फाइन कलेक्शन, दंड की वसूली न होने, ब्याज से मिलनेवाली आय का नुकसान, ठेकेदारों और सलाहकारों को किए गए अतिरिक्त / अनुचित भुगतान" से संबंधित ₹ 200 करोड़ के वित्तीय लेनदेन पर भी सवाल उठाया गया था।

सीएजी ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा स्टे होने के बावजूद जुलाई 2019 और दिसंबर 2019 के बीच ठेकेदारों को ₹142 करोड़ के भुगतान के बारे में भी सवाल किया है।

CAG ने कहा "यह पता चला है कि 16 जुलाई 2019 से 01 जनवरी 2020 के दौरान काम पूरी तरह से बंद था और 2 जनवरी, 2020 को फिर से शुरू किया गया। इसलिए ठेकेदार इस अवधि के दौरान किसी भी भुगतान के लिए हकदार नहीं है क्योंकि काम रोक दिया गया था। हालांकि ठेकेदार को भुगतान किए गए बिलों की जांच से पता चला कि ₹73.92 करोड़ + ₹68.27 करोड़ का भुगतान किया गया जिसमें 16 जुलाई 2019 से 1 जनवरी 2020 तक की अवधि के लिए किया गया भुगतान भी शामिल है।"

CAG द्वारा कुल 8 सवाल किये गए थे और बीएमसी ने कुछ सवालों का जवाब दिया है। फिलहाल बीएमसी ने ₹12,000 करोड़ से अधिक की परियोजना के लिए 40% से अधिक सिविल कार्यों को पूरा कर लिया है।

 

 

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