फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) को 45 दिन के अंदर MSME को बकाया अमाउंट का पेमेंट करने को कहा है। उन्होंने शुक्रवार (16 सितंबर) को यह निर्देश दिया। एमएसएमई का मतलब छोटे उद्यमों से है। इसके तहत माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज आते हैं।
सीतारमण ने यह भी माना कि केंद्र, राज्य और सरकारी कंपनियों के पास एमएसएमई सेक्टर का काफी पैसा बकाया है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर के पास भी एमएसएमई का बकाया है। प्राइवेट सेक्टर एमएसएमई से गुड्स और सर्विसेज लेती है।
उन्होंने कहा कि दो दिन पहले उद्योग के दिग्गजों के साथ उनकी मीटिंग हुई थी। इसमें उन्होंने इंडस्ट्रियलिस्ट्स से एमएसएमई का बकाया अमाउंट चुका देने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसा करना जरूरी है क्योंकि एमएसएमई इकोनॉमी की रीढ़ हैं। इसलिए उनके पैसे समय पर चुकाए जाने चाहिए।
लघु उद्योग भारती एक कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा था, "प्राइवेट सेक्टर और इंडस्ट्री को आरओसी के पास फाइल की गई बुक ऑफ अकाउंट्स के हिसाब से 45 दिन के अंदर पेमेंट कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्राइवेट सेक्टर को आगे रहना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी पेमेंट के मामले के निपटारे के लिए कदम उठाएगी। वह यह सुनिश्चित करेंगी कि सरकारी डिपार्टमेंट और सरकारी कंपनियों की तरफ से छोटे बिजनेसेज को 90 दिन के अंदर पेमेंट कर दिया जाए। उन्होंने राज्य सरकारों के साथ सरकारी कंपनियों से भी एमएसएमई को समय पर उनका बकाया चुकाने की अपील की। फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि मंत्रालय में उनके सहयोगी भी एमएसएमई के बकाया रकम का मामला अक्सर उठाते रहते हैं।