Q1 GDP: एक्सपर्ट्स ने जीडीपी ग्रोथ 15% रहने की उम्मीद जताई, आज शाम आएगा डेटा

अप्रैल-जून 2021 में जीडीपी की ग्रोथ साल दर साल आधार पर रिकॉर्ड 20.1 फीसदी थी। इसकी वजह बेस इफेक्ट था, क्योंकि अप्रैल-जून 2020 में जीडीपी में 21.4 फीसदी गिरावट आई थी

अपडेटेड Aug 31, 2022 पर 11:00 AM
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कोरोना की महामारी कमजोर पड़ने से आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे इकोनॉमी में मजबूती आई है।

इंडिया की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) इस फाइनेंशियल ईयर (2022-23) की पहली तिमाही में 15 फीसदी रहने का अनुमान है। मनीकंट्रोल के एक पोल से यह संकेत मिला है। इस पोल में 15 इकोनॉमिस्ट्स ने हिस्सा लिया। यह इंडिया की जीडीपी की दूसरी सबसे ज्यादा ग्रोथ होगी। हालांकि, 2012 के बाद से ही जीडीपी की तिमाही ग्रोथ के आंकड़ों की तुलना की जा सकती है। जून तिमाही के जीडीपी के आंकड़े 31 अगस्त शाम में आने वाले हैं।

जून तिमाही की डबल डिजिट ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह लो बेस है। स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री 31 अगस्त (बुधवार) को शाम 5:30 बजे जून तिमाही की जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े पेश करेगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ग्रुप के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष ने कहा, "FY21 के लो बेस और FY22 के बहुत हाई बेस की वजह से जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है।"

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इकोनॉमिस्ट्स का अनुमान है कि जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 12.4 से 17.8 फीसदी के दायरे में रह सकती है। अप्रैल-जून 2021 में जीडीपी की ग्रोथ साल दर साल आधार पर रिकॉर्ड 20.1 फीसदी थी। इसकी वजह बेस इफेक्ट था, क्योंकि अप्रैल-जून 2020 में जीडीपी में 21.4 फीसदी गिरावट आई थी। तब कोरोना की महामारी की वजह से देश में लॉकडाउन लगा था। इससे आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ गई थी।

घोष का मानना है कि इस साल जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ ज्यादा रहने की दूसरी वजहें भी हैं। उन्होंने बताया कि 41 हाई-फ्रीक्वेंसी लीडिंग इंडिकेटर्स में से 89 फीसदी ने आर्थिक गतिविधियों में तेजी के संकेत दिए हैं। एक साल पहले यह आंकड़ा 75 फीसदी था।

DBS Bank में इंडिया इकोनॉमिस्ट राधिका राव ने कहा, "वैक्सीनेशन रेट में सुधार आया है और लोकडाउन जैसी पाबंदियां खत्म होने से शहरों में कंजम्प्शन बढ़ा है। खासकर सर्विस सेक्टर में गतिविधियां शुरू होने का काफी असर पड़ा है। एंटरटेनमेंट, हॉस्पिटल्स, डोमेस्टिक और इंटरनेशनल ट्रैवल, रेस्टॉरेंट्स आदि में सामान्य कामकाज हो रहा है।"

बार्कलेज के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट राहुल बजोरिया ने कहा, "यहां तक कि मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर की ग्रोथ डबल-डिजिट में रहने की उम्मीद है। निर्यात अच्छा रहा है। ज्यादा गर्मी पड़ने की वजह से भी डिमांड को सपोर्ट मिला।"

ज्यादा गर्मी पड़ने से इलेक्ट्रिसिटी की डिमांड बढ़ गई। लेकिन, इसका खराब असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा। इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि इस साल कृषि उत्पादन पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

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