रघुराम राजन ने बड़े देशों को कर्ज का बोझ घटाने की नसीहत दी, कहा-अगली महामारी के वक्त यह कर्ज बड़ी मुसीबत साबित होगा

आरबीआई के गवर्नर रह चुके रघुराम राजन ने अमेरिका सहित बड़े देशों को कर्ज के बढ़ते बोझ से आगाह किया। रोम में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि जो देश कर्ज का बोझ बढ़ने दे रहे हैं वे खुद के लिए परेशानियां बढ़ा रहे हैं। ऐसे देशों को जब अगला संकट आएगा तब काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा

अपडेटेड Nov 20, 2024 पर 2:52 PM
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आईएमएफ के मुताबिक, ग्लोबल पब्लिक डेट यानी दुनिया के देशों पर कर्ज का बोझ बढ़कर इस साल के अंत तक 100 लाख करोड़ डॉलर पहुंच जाने का अनुमान है।

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बढ़ते कर्ज को लेकर अमेरिका सहित बड़े देशों को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी दुनिया में कर्ज को बढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती, जिसमें महामारी का खतरा पहले से ज्यादा बढ़ गया है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के चीफ इकोनॉमिस्ट रह चुके राजन ने रोम में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जो देश कर्ज का बोझ बढ़ने दे रहे हैं वे खुद के लिए परेशानियां बढ़ा रहे हैं। ऐसे देशों को जब अगला संकट आएगा तब काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

आने वाले सालों में ज्यादा महामारी का सामना करना पड़ सकता है

राजन (Raghuram Rajan) ने कहा, "हम ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस और महामारी का सामना कर चुके है। बताया जा रहा है कि आने वाले सालों में हमारा महामारी से ज्यादा सामना होने वाला है। ऐसे में हम अपने कर्ज को बढ़ने की इजाजत नहीं दे सकते।" उन्होंने कहा कि उनकी यह चेतावनी अमेरिका के लिए है, जिस पर कर्ज का बोझ धीरे-धीरे बढ़ रहा है। पिछले महीने जारी आईएमएफ के फोरकास्ट से इसका पता चलता है। डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर विचार कर रहे हैं कि अगले साल अमेरिका का राष्ट्रपति बनने पर उन्हें कर्ज के इस बड़े बोझ को संभालने की जिम्मेदारी किसे सौंपना चाहिए।


दुनिया पर कर्ज का बोझ बढ़कर 100 लाख करोड़ डॉलर पहुंच सकता है

राजन ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि हमें इतने ज्यादा कर्ज को बर्दाश्त कर सकते हैं। यह हमें कमजोर करता है। यह साफ तौर पर अमेरिका के लिए एक मैसेज है।" आईएमएफ के मुताबिक, ग्लोबल पब्लिक डेट यानी दुनिया के देशों पर कर्ज का बोझ बढ़कर इस साल के अंत तक 100 लाख करोड़ डॉलर पहुंच जाने का अनुमान है। यह ग्लोबल जीडीपी का 93 फीसदी होगा। इसमें अमेरिका और चीन की बड़ी हिस्सेदारी है। आईएमएफ का कहना है कि इनफ्लेशन में कमी आ रही है और इंटरेस्ट रेट घट रहा है। यह सरकार के लिए अपनी वित्तीय सेहत ठीक करने का अच्छा मौका है। लेकिन, ऐसा करने की चाहत दिख नहीं रही है।

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ज्यादा कर्ज मुश्किल वक्त में बड़ी मुसीबत साबित होता है

आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि कर्ज को घटाना जरूरी है, क्योंकि इससे जरूरत पड़ने पर सरकार के लिए कर्ज लेने की गुंजाइश होती है। भविष्य में इस तरह की स्थिति पैदा होने की संभावना को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कर्ज का बोझ ज्यादा होने पर एक देश के लिए दूसरे देश की मदद करना भी मुश्किल हो जाता है। इससे दुनिया के लिए रिस्क बढ़ जाता है। रोम में सालाना बैंकोर प्राइज के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं।

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