RBI के डिप्टी गवर्नर पात्रा का कार्यकाल एक साल बढ़ा, सरकार ने दी मंजूरी

RBI Deputy Governor : Michael Patra का तीन साल का कार्यकाल 14 जनवरी को खत्म होने जा रहा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने पात्रा की आरबीआई के डिप्टी गवर्नर के रूप में फिर से एक साल के लिए नियुक्ति को मंजूरी दे दी है, जो 15 जनवरी से प्रभावी होगी

अपडेटेड Jan 10, 2023 पर 9:36 AM
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Michael Patra ने दिसंबर 2008 से जून 2012 के दौरान कार्यकारी निदेशक (भारत) के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में काम किया है

RBI Deputy Governor Michael Patra : केंद्र सरकार ने सोमवार को रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उनका तीन साल का कार्यकाल 14 जनवरी को खत्म होने जा रहा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) ने पात्रा की आरबीआई के डिप्टी गवर्नर के रूप में फिर से एक साल के लिए नियुक्ति को मंजूरी दे दी है, जो 15 जनवरी से प्रभावी होगी।

क्या काम संभालते हैं पात्रा

केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर और दर निर्धारित करने वाली मॉनेट्री पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) के सदस्य के रूप में, पात्रा मॉनेट्री पॉलिसी डिपार्टमेंट देखते हैं। छह सदस्यीय मॉनेट्री पॉलिसी कमेटी की अगुआई आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) कर रहे हैं।


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गवर्नर के अलावा आरबीआई में चार डिप्टी गवर्नर हैं। तीन अन्य डिप्टी गवर्नरों मे एमके जैन, एम राजेश्वर राव और टी रबि शंकर शामिल हैं।

आईएमएफ में काम कर चुके हैं पात्रा

पात्रा ने दिसंबर 2008 से जून 2012 के दौरान कार्यकारी निदेशक (भारत) के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में काम किया है। उस समय, वे वैश्विक वित्तीय संकट और चल रहे यूरो क्षेत्र संप्रभुता की अवधि के दौरान आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड के काम में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे।

बीते साल नवंबर में, पात्रा ने कहा कि मॉनेट्री पॉलिसी अपने स्वभाव से आर्थिक नीति-निर्माण का एक तकनीकी क्षेत्र है और इसे दूरदर्शी होना चाहिए। पॉलिसी रेट्स में बदलाव का असर बाजारों पर होता है और अंततः उधारी दरों, मॉर्टगेज दरें और पैदावार इससे प्रभावित होती हैं।

पात्रा ने की थी मॉनेट्री पॉलिसी के उद्देश्यों की समीक्षा की थी वकालत

उन्होंने कहा था, मौजूदा दौर जैसी महंगाई चार दशकों में नहीं दिखी है। ऐसे में सवाल पूछा जा रहा है क्या दुनिया कम महंगाई वाले माहौल से ज्यादा महंगाई वाले दौर में शिफ्ट हो रही है। अब मॉनेट्री पॉलिसी के उद्देश्यों की समीक्षा करने का वक्त आ गया है।

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