RBI Governor Shaktikanta Das : आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने भारत के करेंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) यानी CAD से जुड़ी चिंताएं खारिज करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सीएडी काफी हद तक प्रबंधन के लायक है और व्यवहार्यता के मानकों के भीतर है। दास ने कहा कि भारत के मजबूत सर्विसेज एक्सपोर्ट्स (services exports) और भारी रेमिटेंस यानी विदेश से आने वाले धन के कारण वैश्विक स्तर पर मर्चेंडाइज डिमांड में सुस्ती के चलते होने वाले बाहरी घाटे के असर को कम करने में मदद मिलेगी।
ट्रेड संबंधों को विकसित करना जरूरी
उन्होंने कहा कि भारत को डि-ग्लोबलाइजेशन और संरक्षणवाद के दौर में द्विपक्षीय ट्रेड व्यवस्था के दोहन की जरूरत है। गवर्नर ने कहा कि दुनिया में हाल में सप्लाई चेन से जुड़े झटके के चलते बाहरी मोर्चे पर डिग्लोबलाइजेशन और संरक्षणवाद तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए इन चुनौतियों से पार पाने के लिए द्विपक्षीय ट्रेड संबंधों को विकसित करना और उन्हें मजबूती देना जरूरी है। भारत ने हाल में यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय ट्रेड समझौते किए हैं। साथ ही ऐसे कई समझौतों पर बातचीत जारी है।
कीमतों में बढ़ोतरी यानी महंगाई पर उन्होंने कहा कि भले ही नवंबर और दिसंबर में इसमें कमी आई है, लेकिन महंगाई अभी भी ज्यादा है।
दास ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर आकर्षक स्थल माना जाता है और इसका फाइनेंशियल सिस्टम मजबूत और स्थिर है। रुपये में कमजोरी पर गवर्नर ने कहा कि भारतीय करेंसी (Indian currency) ने दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक संकट के बाद किभी भी वैश्विक उथलपुथल में रुपये में कमजोरी कम ही रही है।