RBI ने मॉनेटरी पॉलिसी पेश कर दी है। उसके रेपो रेट (Repo Rate) में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। हालांकि, इसकी उम्मीद पहले से की जा रही थी। मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को लेकर हुए ज्यादातर सर्वे में इकोनॉमिस्ट्स का यह कहना था कि केंद्रीय बैंक 8 जून को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। लगातार दूसरी मॉनेटरी पॉलिसी में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट नहीं बढ़ाया है। इससे पहले 6 अप्रैल को मॉनेटरी पॉलिसी में भी उसने रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखा था।
6 में से MPC के 5 सदस्या रेपो रेट में बदलाव नहीं करने के पक्ष में
मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक मंगलवार को शुरू हुई थी। तीन दिन की बैठक के बाद इसके नतीजे 8 जून को आए। MPC की बैठक में छह में से 5 सदस्यों ने रेपो रेट को मौजूदा स्तर बर बनाए रखने के पक्ष में वोट किया। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मॉनेटरी पॉलिसी पेश करने के दौरान इकोनॉमी की बेहतर सेहत के बारे में बताया। हालांकि, उन्होंने एक बार फिर यह कहा का रिटेल इनफ्लेशन में और कमी लाने की कोशिश जारी रहेगी। इसकी वजह यह है कि इस केंद्रीय बैंक के टारगेट के करीब आ जाना पर्याप्त नहीं है।
इनफ्लेशन में धीरे-धीरे आ रही है कमी
आरबीआई ने पिछले साल मई से रेपो रेट बढ़ाने का सिलसिला शुरू किया था। उसका असर रिटेल इनफ्लेशन पर पड़ा है। हाल के महीनों में इसी कमी आई है। लगातार दूसरे महीने घटकर यह मई में 4.7 फीसदी पर आ गया। यह रिटेल इनफ्लेशन का 18 महीने का निचला स्तर है। लेकिन, यह अब भी RBI के 4 फीसदी के टारगेट से ज्यादा है। इधर, इकोनॉमिक ग्रोथ भी रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है। इस साल मार्च तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ 6.1 फीसदी रही। यह इकोनॉमिस्ट्स के अनुमान से ज्यादा है।
जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी रहने का अनुमान
RBI के गवर्नर ने इनफ्लेशन को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इस पर हमारी करीब नजर बनी रहेगी। जीडीपी की ग्रोथ के बारे में शक्तिकांत दास ने कहा कि फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में इसके 6.5 फीसदी रहने की उम्मीद है। पहली तिमाही यानी जून तिमाही में यह 8 फीसदी रह सकता है। दूसरी तिमाही यानी सितंबर तिमाही में यह 6.5 फीसदी रह सकता है। तीसरी तिमाही यानी दिसंबर तिमाही में इसके 6 फीसदी रहने की उम्मीद है। आखिरी तिमाही यानी मार्च तिमाही में यह 5.7 फीसदी रहेगा।
इनफ्लेशन का मीडियम टर्म टारगेट 4 फीसदी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस महीने रिटेल इनफ्लेशन के घटकर 20 महीने के निचले स्तर पर आ जाने की उम्मीद है। आरबीआई ने मीडियम टर्म में इनफ्लेशन के लिए 4 फीसदी का टारगेट रखा है। मई का रिटेल इनफ्लेशन का डेटा इस लेवल पर रहने की उम्मीद है। रिटेल इनफ्लेशन के टारगेट तक आ जाने का मतलब है कि RBI आगे इकोनॉमिक ग्रोथ पर फोकस कर सकता है। अब तक उसकी पहली प्राथमिकता रिटेल इनफ्लेशन को कंट्रोल में करना रहा है।
अब इकोनॉमिक ग्रोथ पर हो सकता है फोकस
ट्रस्ट म्यूचुअल फंड के चीफ एग्जिक्यूटिव संदीप बागला ने कहा है कि जीडीपी की ग्रोथ अच्छी रही है। उधर, इनफ्लेशन में नरमी के संकेत हैं। Deloitte India की इकोनॉमिस्ट रुमकी मजुमदार का भी मानना है कि इकोनॉमी की ग्रोथ की अनदेखी नहीं की जा सकती है। ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती के बीच इंडियन इकोनॉमी अच्छी ग्रोथ दिखा रही है।