RBI की MPC के सदस्य जयंत वर्मा ने कहा, बहुत जरूरी है इनफ्लेशन को जल्द 4% पर लाना

जयंत वर्मा MPC में शामिल तीन एक्सटर्नल मेंबर्स में से एक हैं। उन्होंने कहा कि मेरा स्पष्ट तौर पर मानना है कि जितना जल्द हो सके इनफ्लेशन को 4 फीसदी के करीब लाना जरूरी है। बड़ा सवाल यह है कि इस काम को कितना जल्द किया जा सकता है

अपडेटेड Aug 24, 2022 पर 1:50 PM
जुलाई में रिटेल इनफ्लेशन 6.71 फीसदी रहा। यह पिछले पांच महीने में सबसे कम रिटेल इनफ्लेशन है।

Inflation पर RBI का फोकस बना रहेगा। केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के सदस्य जयंत वर्मा ने यह संकेत दिया। उन्होंने कहा कि जितना जल्द हो सके इनफ्लेशन को 4 फीसदी के मीडियम-टर्म टारगेट पर लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने के दौरान यह देखना होगा कि इकोनॉमी पर किसी तरह का खराब असर नहीं पड़े।

वर्मा MPC में शामिल तीन एक्सटर्नल मेंबर्स में से एक हैं। उन्होंने कहा, "मेरा स्पष्ट तौर पर मानना है कि जितना जल्द हो सके इनफ्लेशन को 4 फीसदी के करीब लाना जरूरी है। बड़ा सवाल यह है कि इस काम को कितना जल्द किया जा सकता है, क्योंकि इसका असर इकोनॉमी पर पड़ेगा।"

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उन्होंने कहा, "हमें यह सोचना होगा कि हम इस काम को छह महीने, 12 महीने या 18 महीने में कर सकते हैं। हम ऐसे समय की ओर बढ़ रहे हैं, जब हमें इस बारे में बातचीत शुरू करनी होगी।" उन्होंने मनीकंट्रोल से बातचीत में इस बारे में बताया।

MPC की 3-5 अगस्त की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स 19 अगस्त को जारी किए गए थे।। इसमें वर्मा ने इनफ्लेशन के मौजूदा स्तर को अस्वीकार्य बताया है। वर्मा आईआईएम-अहमदाबाद के प्रोफेसर हैं। रिजर्व बैंक का सबसे ज्यादा फोकस इनफ्लेशन को कंट्रोल करने पर है।

जुलाई में रिटेल इनफ्लेशन 6.71 फीसदी रहा। यह पिछले पांच महीने में सबसे कम रिटेल इनफ्लेशन है। हालांकि, रिटेल इनफ्लेशन पिछले 34 महीनों से 4 फीसदी से ऊपर बना हुआ है। रिटेल इनफ्लेशन के अगले साल के मध्य तक 4 फीसदी के करीब आने की उम्मीद नहीं है। RBI ने इनफ्लेशन के अपने अनुमान में अगले साल अप्रैल-जून में इसके औसतन 5 फीसदी रहने की बात कही है।

वर्मा का कहना है कि इनफ्लेशन के लिए 4 फीसदी का टारगेट होना चाहिए। किसी तरह की प्रॉब्लम की स्थिति में इसके 2 फीसदी ऊपर या नीचे जाने की गुंजाइश रखी जानी चाहिए। लेकिन, क्राइसिस के असर से निपटने के लिए हमें जल्द उपाय करने होंगे। उन्होंने कहा कि इनफ्लेशन अगर 4 फीसदी पर नहीं आता है तो अगली क्राइसिस के वक्त हमारे पास कोई उपाय नहीं बचेगा।

एमपीसी के सदस्य ने कहा, "जैसे ही कोरोना की महामारी कमजोर पड़ने लगी, हमें इनफ्लेशन को 4 फीसदी पर लाने पर फोकस करना चाहिए था। हमें अगली क्राइसिस के लिए खुद को तैयार रखने के लिए यह जरूरी है। हमने यह देखा है कि क्राइसिस आने पर हमारे पास बहुत कम वक्त होता है।"

RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी मंगलवार को कहा था कि इनफ्लेशन को 4 फीसदी पर लाना जरूरी है। उन्होंने कहा था कि इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए उठाए गए कदमों का असर दिखा है। धीरे-धीरे कीमतें काबू में आती दिख रही हैं।

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