कई महीनों तक इंतजार करने के बाद अब कहा जा सकता है कि इनफ्लेशन (Inflation) को कंट्रोल में करने में RBI नाकाम रहा है। सितंबर के रिटेल इनफ्लेशन (Retail Inflation) के डेटा 12 अक्टूबर को जारी किए गए। इससे इस बात की पुष्टि हो गई कि एवरेज रिटेल इनफ्लेशन लगातार तीन तिमाहियों में 2-6 फीसदी के आरबीआई के टारगेट से ज्यादा रहा है।
इस साल जनवरी-मार्च के दौरान एवरेज इनफ्लेशन 6.3 फीसदी रहा। अप्रैल-जून के दौरान 7.3 फीसदी रहा। जुलाई-सितंबर के दौरान 7 फीसदी रहा। अब RBI को इस बारे में केंद्र सरकार को रिपोर्ट पेश करने होगी। उसे बताना होगा कि किन वजहों से इनफ्लेशन को काबू में नहीं किया जा सका। केंद्रीय बैंक को यह भी बताना होगा कि इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही वह समय बताना होगा, जब इनफ्लेशन टारगेट के अंदर आ जाएगा।
इस रिपोर्ट को तैयार करनेके लिए जल्द मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक होगी। इसकी वजह यह है कि ऐसी रिपोर्ट डेटा आने के एक महीने के अंदर सरकार को भेजना जरूरी होता है। इस हिसाब से केंद्रीय बैंक को 12 नवंबर तक यह रिपोर्ट भेजनी होगी। सवाल यह है कि RBI की इस रिपोर्ट में क्या होगा?
ऊपर बताई गई बातों में दो बिल्कुल स्पष्ट हैं कि इनफ्लेशन क्यों नहीं कंट्रोल में आया और यह कब तक टारगेट तक आ जाएगा। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को जनवरी में बताया था, "कारण ये बताए जाएंगे कि... आप रूस-यूक्रेन लड़ाई को रोक नहीं सकते। इस वजह से सप्लाई में बाधा आई है। इसके अलावा चीन में कोरोना को लेकर 'जीरो कोविड पॉलिसी'भी हाई इनफ्लेशन के लिए जिम्मेदार है।"
इस साल अप्रैल में रिटेल इनफ्लेशन 7.79 फीसदी पर पहुंच गया था। यह रिटेल इनफ्लेशन का 95 महीनों का सबसे ज्यादा लेवल था। सरकार ने यह डेटा 12 मई को जारी किया था। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर Andrew Bailey ने भी इस साल मार्च में इंग्लैंड में इनफ्लेशन काबू में नहीं आने पर एक रिपोर्ट तत्कालीन फाइनेंस मिनिस्टर ऋषि सुनक को सौंपी थी। इसमें रूस-यूक्रेन लड़ाई, सप्लाई में दिक्कत और सेमीकंडक्टर्स जैसी जरूरी चीजों की कमी को हाई इनफ्लेशन का कारण बताया था।
आरबीाई की रिपोर्ट में दूसरी अहम बात यह होगी कि कब तक इनफ्लेशन टारगेट तक आ जाएगा। पिछले कुछ समय से आरबीआई के अधिकारी यह बताते आ रहे हैं कि इनफ्लेशन के 4 फीसदी के लेवल पर आने में करीब दो साल का समय लग जाएगा। 30 सितंबर को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करने के बाद मीडिया से बातचीत में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी कहा था कि दो साल की साइकिल के दौरान इनफ्लेशन के टारगेट तक आ जाने की उम्मीद है। यह पहले भी हमारा अनुमान था और अब भी है। इनफ्लेशन बढ़ने के पीछे तीसरी कोई वजह नजह नहीं आती।