इन दिनों चारो ओर मंदी (Recession) की खूब चर्चा हो रही है। अमेरिका में तकनीकी तौर पर मंदी ने दस्तक दे दी है। पिछली दो तिमाहियों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था काफी सिकुड़ गई है। इसके उलट भारत में स्थितियां उतनी बिगड़ी नहीं दिख रही हैं। हालांकि भारत में महंगाई डायन का कोहराम मचा हुआ है। अन्य केंद्रीय बैंकों की देखा देखी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी ब्याज दरें बढ़ाई हैं। जॉब मार्केट कमजोर है। इधर भारत में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत में मंदी का सवाल ही नहीं उठता है।
वहीं RBI के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने भी कहा था कि मंदी के मामले में भारत की स्थिति बेहद मजबूत है। उसके पास हर स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त मुद्रा भंडार है।
आखिर देश में मंदी के क्या संकेत हैं। यह जानना बेहद जरूरी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदी आने का एक ऐसा पैरामीटर है। जिसे सुनकर आप भले ही आश्चर्य में पड जाएं। लेकिन इस पैरामीटर पर बहुत से लोग नजर रखते हैं। वह अंडरवीयर और टी-शर्टों की बिक्री (Underwear and T-shirts Sales) है। आपको सुनकर थोड़ा अटपटा जरूर लग सकता है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पूर्व प्रमुख एलन ग्रींसपैन (Alan Greenspan) पुरुषों की अंडरवीयर की बिक्री पर काफी नजर रखते थे। वह मानते थे कि इससे मंदी का अनुमान लगाया जा सकता है। ऐसे में अगर अंडरवीयर और टी-शर्ट की बिक्री को पैरामीटर मान भी लें तो भारत के बारे में मंदी की क्या स्थिति है?
एलन ग्रींसपैन की गिनती धुरंधर अर्थशास्त्रियों की जाती थी। अमेरिका के केंद्रीय बैंक के प्रमुख भी रहे। उनका मानना था कि अंडरवीयर की बिक्री से मंदी के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है। अगर लोग अंडरवियर कम खरीद रहे हैं। इसका मतलब है कि लोग फाइनेंशियली दबाव का सामना कर रहे हैं। इसकी वजह ये है कि जब लोगों के पास पैसे कम होंगे तो अंडरवियर तक नहीं बदल पाते हैं।
अगर अंडरवियर इंडेक्स को मान लें तो हम आपको बता रहे हैं कि भारत में अंडरवियर बनाने वाली कंपनियों की क्या स्थिति है? अगर अंडरवियर बनाने वाली कंपनी जॉकी की बात करें तो कंपनी को पिछले साल के मुकाबले जनवरी से मार्च 2022 के दौरान पेज इंडस्ट्रीज की बिक्री 26 फीसदी बढ़ी है। यह तब है जब उसने साल के दौरान कीमतों में 13 फीसदी की बढ़ोतरी की। कॉटन की कीमतें बढ़ने के कारण अंडरवीयर के दाम बढ़ाने पड़े थे।
दूसरे इंडिकेटर यानी टी-शर्ट की बिक्री पर चर्चा करते हैं। इसके लिए वी-मार्ट को लेते हैं। कंपनी के रेवेन्यू में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी वित्त वर्ष 2022-23 में अपने स्टोरों की संख्या में भी इजाफा करने के बारे में सोच रही है। अभी इसके 380 स्टोर हैं। इसमें 60 स्टोर और जोड़े जा सकते हैं। अब अगर हम टी शर्ट और अंडरवीयर इंडेक्स संकेत मान ले तो भारत फिलहाल मंदी से कोसों दूर है।