RBI की Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक अगले हफ्ते होने वाली है। बैठक सोमवार (6 जून) को शुरू होगी। यह 8 जून यानी बुधवार को खत्म होगी। केंद्रीय बैंक की MPC की बैठक में रेपो रेट बढ़ाने पर फैसला हो सकता है। RBI के सामने इनफ्लेशन को बढ़ने से रोकने का चैलेंज है। पिछले महीने की शुरुआत में आरबीआई ने अचानक रेपो रेट बढ़ा दिया था।
अमेरिका, इंग्लैंड सहित दुनिया के कई देशों में इनफ्लेशन तेजी से बढ़ा है। इसे बढ़ने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहे हैं। इंडिया में भी इस साल रेपो रेट कई बार बढ़ाया जा सकता है। एक्सिस बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट सौगता भट्टाचार्य ने कहा है कि RBI इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक रेपो रेट बढ़ाकर 5.75 फीसदी कर सकता है। अभी रेपो रेट 4.40 फीसदी है।
भट्टाचार्य ने कहा कि रिटेल इनफ्लेशन पिछले चार महीने से RBI की तय रेंज से ज्यादा है। महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए RBI इंटरेस्ट रेट में कई बार वृद्धि कर सकता है। जहां तक अगले हफ्ते MPC की बैठक में रेपो रेट बढ़ाने की बात है तो RBI गवर्नर शक्तिकांत दास पहले ही इसका संकेत दे चुके हैं। हाल में उन्होंने कहा था कि जून की बैठक में रेपो रेट में वृद्धि का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है।
RBI तेजी से बढ़ते इनफ्लेशन के खतरे को समझ रहा है। अप्रैल में उसने इस फाइनेंशियल ईयर में इनफ्लेशन के अनुमान को 4.5 फीसदी से बढ़ाकर 5.7 फीसदी कर दिया था। उसने इस फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी 7.8 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया था। उसने इसका कारण यूक्रेन क्राइसिस बताया था।
अगर RBI रेपो रेट बढ़ाना जारी रखता है तो इससे कर्ज बहुत महंगा हो जाएगा। पिछले महीने रेपो रेट बढ़ने के बाद करीब सभी प्रमुख बैंक लोन पर इंटरेस्ट रेट बढ़ा चुके हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सस्ते लोन का दौर खत्म होता दिख रहा है।
होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ रहा है। इसका असर रियल घरों और गाड़ियों की बिक्री पर पड़ना तय है। करीब दो साल इकोनॉमी में मांग बढ़ रही है। इससे इकोनॉमिक रिकवरी में तेजी आई है। इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी से रिकवरी को झटका लग सकता है।