ग्लोबल इकोनॉमी (Global Economy) मंदी की तरफ बढ़ रही है। रायटर्स के पोल (Reuters poll) में शामिल इकोनॉमिस्ट्स ने एक बार फिर दुनिया की प्रमुख इकोनॉमीज की ग्रोथ के अनुमान घटा दिए हैं। उधर, इनफ्लेशन को बढ़ने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंकों ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाना जारी रखा है।
एक अच्छी बात यह है कि ज्यादातर बड़ी इकोनॉमीज जो पहले ही मंदी में चले गए हैं या मंदी की तरफ बढ़ रहे हैं, उनमें पिछली मंदी के मुकाबले बेरोजगारी का लेवल कम है। पोल के नतीजों के मुताबिक, ग्रोथ रेट और बेरोजगारी दर का अंतर कम से कम चार दशकों में सबसे कम रहने की उम्मीद है।
पोल में शामिल अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस मंदी की अवधि छोटी रहेगी और यह ज्यादा गहरी नहीं होगी। हालांकि, इनफ्लेशन का लेवल उम्मीद के मुकाबले लंबे समय तक हाई बना रह सकता है। दुनिया के बड़े देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में कुल संभावित वृद्धि का दो-तिहाई कर चुके हैं। लेकिन, इनफ्लेशन के ऊंचे लेवल पर बने रहने की वजह से इंटरेस्ट रेट में आगे भी बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रह सकता है।
दुनिया के कई बड़े देशों के केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन का सही अंदाजा लगाने में नाकाम रहे। इसलिए उन्होंने इस साल कई बार इंटरेस्ट रेट बढ़ाया। ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स और केंद्रीय बैंकों का मानना है कि उनके लिए अगले साल करने को ज्यादा कुछ नहीं बचा है।
Rabobank के ग्लोबल स्ट्रेटिजिस्ट माइकल एवरी ने कहा, "ग्लोबल रिसेशन के रिस्क के बारे में हर कोई बात कर रहा है। मेरा मानना है कि अगर आप प्रमुख इकोनॉमीज में ट्रेंड को देखें तो इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।" बेरोजगार की कम दर भी समस्या पैदा करने वाली है, क्योंकि इस पर असर दिखने में समय लगता है। यह जब तक कम लेवल पर रहेगी, केंद्रीय बैंकों को लगेगा कि उनके पास रेट बढ़ाने की गुंजाइश बची हुई है।
इस पोल में शामिल 22 केंद्रीय बैंकों में से सिर्फ छह का मानना था कि अगले साल के अंत तक इनफ्लेशन उनके टारगेट तक आ जाएगा। यह जुलाई के पोल से ज्यादा है, जब 18 में से दो तिहाई केंद्रीय बैंकों ने अगले साल अंत तक इनफ्लेशन के टारगेट तक आ जाने की उम्मीद जताई थी।
डोएचे बैंक के एनालिस्ट्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "...हिस्ट्री कभी खुद को पूरी तरह नहीं दोहराती है। लेकिन, पिछले 18 महीनों में इनफ्लेशन का अनुमान लगाने में हम सही नहीं रहे हैं इसलिए यह पूछना स्वाभाविक है कि अगर इनफ्लेशन टारगेट से ऊपर निकल, जाता है तो क्या होता है। इसका जवाब है कि यह लंबे समय तक हाई बना रहता है।"
इस बीच ग्लोबल इक्विटी और बॉन्ड मार्केट में उथल-पुथल है, जबकि अमेरिकी डॉलर कई दशकों की ऊंचाई पर पहुंच गया है। ग्लोबल ग्रोथ 2023 में 2.3 फीसदी रहने का अनुमान है। पहले इसके 2.9 फीसदी रहने का अनुमान था। 2024 में ग्रोथ बढ़कर 3 फीसदी पहुंच जाने का अनुमान है।