डॉलर के मुकाबले रुपया में गिरावट जारी है। 22 जून को यह गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि रुपया में गिरावट जारी रह सकता है। जियोपॉलिटिकल टेंशन और सप्लाई चेन में दिक्कतों की वजह से रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
डॉलर के मुकाबले रुपया में गिरावट जारी है। 22 जून को यह गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि रुपया में गिरावट जारी रह सकता है। जियोपॉलिटिकल टेंशन और सप्लाई चेन में दिक्कतों की वजह से रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
DBS में इकोनॉमिस्ट राधिका राव ने एक रिपोर्ट में कहा है, "जब तक ऑयल और डॉलर में बड़ी गिरावट नहीं आती रुपया पर दबाव बना रहेगा।" बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज ने रुपया के टारगेट में बदलाव किया है। उसने इस साल के अंत तक इसके 81 के स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान जताया है। पहले उसने साल के अंत तक इसके 79 के स्तर तक जाने का अनुमान लगाया था।
22 जून (बुधवार) को डॉलर के मुकाबले रुपया 78.13 के स्तर पर खुला। फिर यह गिरकर 78.29 के स्तर पर आ गया। आखिर में यह 78.39 के स्तर पर बंद हुआ। मंगलवार को रुपया 78.08 के स्तर पर बंद हुआ था।
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इस साल अब तक रुपया 5 फीसदी गिर चुका है। इसकी वजह शेयर बाजार में फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली है। उन्होंने इस साल अब तक 27.22 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं। अगर पिछले 9 महीनों की बात करें तो उनकी बिकवाली करीब 32 अरब डॉलर की रही है।
इनपुट कॉस्ट से कंपनियों के मार्जिन में कमी आ सकती है। ग्रोथ सुस्त रहने से कंपनियों के लिए बड़ी लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना मुश्किल होगा। बढ़ता इनफ्लेशन भी सेंटिमेंट पर असर डाल रहा है। खासकर इंडिया जैसे उभरते बाजारों में इसका ज्यादा असर दिख रहा है।
राव ने कहा, "इंडिया में इनफ्लेशन का असर सबसे ज्यादा है। फूड और फ्यूल की वजह से रिटेल इनफ्लेशन टारगेट से ऊपर बना हुआ है। अच्छी बात यह है कि दक्षिणपूर्व मानसून 20 जून तक सामान्य से सिर्फ 5 फीसदी कम रहा है। पिछले महीने यह सामान्य से 30 फीसदी कम था।"
कृषि आधारित राज्यों में बारिश का एक समान वितरण बहुत अहम है। राव ने कहा, "वित्त वर्ष 2023 के दौरान राजकोषीय घाटा लक्ष्य से ज्यादा रह सकता है। इसकी वजह गैर-पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी है। सब्सिडी और दूसरी सामाजिक योजनाएं इसकी वजह हैं।"
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