ASER 2021 Report: Covid-19 के कारण प्राइवेट स्कूलों को छोड़ सरकारी में गए ज्यादा बच्चे, मां-बाप पर बढ़ा ट्यूशन फीस का बोझ

ASER 2021 Report: पिछले एक साल में सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन 65.8 फीसदी से बढ़कर 70.3 फीसदी हो गया है

अपडेटेड Nov 17, 2021 पर 8:21 PM
ट्यूशन क्लास लेते बच्चे (FILE)

भारत भर में सभी स्कूल Covid-19 महामारी के कारण लंबे समय तक बंद रहे, जिसके चलते छात्रों को कोचिंग या ट्यूशन का सहारा लेना पड़ा। फिर चाहे वो सरकारी स्कूल हो या प्राइवेट, देश भर में बच्चे काफी हद तक ट्यूशन पर ही निर्भर रहे। एक बेहद ही चौंकाने वाली बात ये है कि ट्यूशन लेने वाले बच्चों के रेश्यो में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बेहद वंचित परिवारों के बच्चों में हुई है।

जैसे ही Covid-19 के कारण स्कूल बंद हुए, तो बच्चों को अपने परिवारों से मदद की दरकार हुई। अब ऐसे में शुरुआती पीड़ी के बच्चे या जिनके माता-पिता कम पढ़े लिखे थे, उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई करना काफी मुश्किल था।

भले ही आर्थिक तंगी के चलते कई बच्चों को प्राइवेट स्कूलों को छोड़ कर सरकारी स्कूलों का रुख करना पड़ा हो, फिर भी माता-पिता को उनके ट्यूशन की फीस भरनी पड़ी। ASER Report 2021 के मुताबिक, पिछले एक साल में सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन 65.8 फीसदी से बढ़कर 70.3 फीसदी हो गया है।


ASER ने बताया, 'ये बेहद चौंकाने वाली बात है कि आर्थिक स्थिति के चलते कई बच्चों को भले ही प्राइवेट स्कूल छोड़ सरकारी स्कूल में जाना पड़ा हो या हो सकता है, लेकिन माता-पिता को तब भी उनकी ट्यूशन फीस भरनी पड़ी।'

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रिपोर्ट के अनुसार, ट्यूशन क्लास को ज्यादा पसंद किया गया, क्योंकि वे लोकल होती हैं, जहां फीस लचीले ढंग से दी जाती है। साथ ही जल्दी से ट्यूटर और परिवार के बीच बातचीत होने पर तय भी हो जाती है।

शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (ASER) 2021 में सामने आया, 'जिन बच्चों के माता-पिता कम पढ़े लिखे हैं, उन बच्चों के ट्यूशन लेने में 12.6 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई, जबकि जिन बच्चों के माता ज्यादा पढ़े लिखे हैं, उन बच्चों के ट्यूशन लेने में 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।'

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ट्यूशन क्लास लेने वाले छात्रों की संख्या 2018 में 28.6 फीसदी से बढ़कर 2020 में 32.5 फीसदी और 2021 में 39.2 फीसदी हो गई है।

यहां तक ​​कि कक्षा 1 से 2 तक के तीन बच्चों में से एक ने कभी भी स्कूलों में फिजिकल क्लास नहीं ली थी, उन्होंने ट्यूशन क्लास लेना शुरू कर दिया था। वहीं सबसे ज्यादा 9वीं क्लास से ऊपर के बच्चे ट्यूशन क्लास लेते हैं, जो कुल ट्यूशन लेने वाले बच्चों का 41.1 प्रतिशत है।

सरकारी स्कूलों के बच्चे ट्यूशन पर हैं ज्यादा निर्भर

सरकारी स्कूलों में जाने वाले बच्चे प्राइवेट स्कूलों की तुलना में ट्यूशन पर ज्यादा निर्भर थे। सरकारी स्कूलों में, 2021 में 39.5 प्रतिशत छात्र ट्यूशन पर निर्भर थे, प्राइवेट स्कूलों से थोड़ी बढ़ोतरी हुई, जिसमें 38.2 प्रतिशत बच्चों ने ट्यूशन में दाखिला लिया।

कोचिंग के लिए लड़कियों से ज्यादा जाते हैं लड़के

लिंग के हिसाब से देखें, तो लड़कियों की तुलना में ज्यादा लड़के ट्यूशन जाते हैं। ये ट्रेंड सालों से लगातार ऐसा ही रहा है। ASER के मुताबिक, 2021 में 40.3 फीसदी लड़कों और 37.9 फीसदी लड़कियों को ट्यूशन क्लास की मदद लेनी पड़ी।

वहीं 2018 में, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल में स्कूल जाने की उम्र के 50 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे किसी न किसी तरह ट्यूशन क्लास ले रहे थे। 2021 में, यह आंकड़ा ओडिशा में 60 प्रतिशत और बिहार और पश्चिम बंगाल में 70 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है।

ASER 2021 रिपोर्ट कहती है कि लगभग सभी राज्यों में बच्चों के ट्यूशन क्लास लेने इजाफा हुआ और यह शायद लंबे समय तक स्कूल बंद रहने के कारण हुआ है।

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