DU Examination Fees: यूनिवर्सिटी ने एग्जाम फीस से जुटाए 9.5 करोड़ रुपए, Samarth पोर्टल की मदद से जमा हुई दोगुना रकम

अधिकारियों ने कहा कि कई कॉलेज यूनिवर्सिटी को पूरी एग्जाम फीस ट्रांसफर नहीं करते थे

अपडेटेड Dec 12, 2021 पर 8:11 PM
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) (FILE)

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने लगभग 1.4 लाख छात्रों से एग्जाम फीस (Examination Fees) के रूप में लगभग 9.5 करोड़ रुपए जमा किए। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, ये रकम यूनिवर्सिटी को पिछले साल मिली एग्जाम फीस से लगभग दोगुना है। अधिकारियों ने एजेंसी को बताया कि केंद्र के समर्थ पोर्टल (Samarth portal) के साथ शुरू की गई पारदर्शिता के कारण ही ऐसा हो पाया है।

इससे पहले, कई कॉलेज यूनिवर्सिटी को पूरी एग्जाम फीस ट्रांसफर नहीं करते थे, क्योंकि पहले ऐसा कोई सिस्टम नहीं था, जिससे ये आने वाली फीस पर निगरानी रखी जा सके।

हर एक छात्र पर प्रति सेमेस्टर 500 रुपए की एग्जाम फीस लगाई जाती है, जबकि उसे हर एक प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए 200 रुपए का भुगतान करना पड़ता है। दोबारा परीक्षा के लिए उपस्थित होने वाले छात्र अतिरिक्त 500 रुपए भरते हैं।


यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए बताया कि समर्थ ने परीक्षा फीस वसूली को सेंट्रलाइज्ड प्रोसेस बना दिया है। अधिकारियों ने कहा, 'पहले, कॉलेज इस पैसे को इकट्ठा करते थे, लेकिन कई यूनिवर्सिटी को पूरी पेमेंट नहीं करते थे। यूनिवर्सिटी के तहत अलग-अलग कॉलेजों से छात्रों की संख्या और संबंधित फीस का ट्रैक करना मुश्किल होता था।'

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उन्होंने आगे कहा, 'एक और मुद्दा यह था कि कई कॉलेज एक छात्र के एडमिशन के समय ही एग्जाम फीस जमा करते थे और इसलिए यह साफ नहीं होता कि छात्र कौन से पेपर का चुनाव करेगा। इसलिए, यह काफी संभावना थी कि या तो छात्र सटीक राशि से ज्यादा या कम भुगतान कर रहा था।'

परीक्षा के डीन डीएस रावत ने कहा कि समर्थ पर लगभग 1.4 लाख छात्रों की डिटेल अपलोड करने में यूनिवर्सिटी को तीन महीने से ज्यादा का समय लगा। उन्होंने कहा, 'इस बार, छात्रों ने पोर्टल पर अपने एग्जाम फॉर्म भरे। इसने कई लॉजिस्टिक मुद्दों को हल किया, जिनका हम पहले सामना कर रहे थे।'

रावत ने पिछली व्यवस्था में खामियों पर भी जोर डाला। उन्होंने कहा कि पहले, कभी-कभी, कॉलेज छात्रों को तीसरे सेमेस्टर में प्रमोट कर देते थे और यहां तक उन्हें ये बिना बताए ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दे देते थे कि उन्होंने पिछला सेमेस्टर क्लियर किया भी या नहीं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का इन-हाउस सॉफ्टवेयर भी ऐसे मामलों की जांच नहीं कर पता है।

उन्होंने कहा, "अब, जिन छात्रों ने अपने पिछले सेमेस्टर को पास नहीं किया है, उन्हें अपना रिजल्ट भी नहीं मिलता है और वे नए सेमेस्टर के लिए एग्जाम फॉर्म नहीं खोल सकते हैं।" उन्होंने कहा, पोर्टल में हर एक छात्र की सभी शैक्षणिक जानकारी होती है।

उन्होंने कहा, "यहां तक ​​कि जब छात्र फॉर्म भर रहे होते हैं, तब भी उनके विषयों और पेपर कोड पर पहले से निशान लगा दिया जाता है। पहले, छात्रों को अपनी डिटेल मैन्युअल रूप से भरनी पड़ती थी और पेपर कोड में की होती थी, जिससे कभी-कभी गलतियां होती थीं।"

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