आमतौर पर 10वीं और 12वीं कक्षा में बोर्ड एग्जाम के बारे में सुना होगा लेकिन एक राज्य ऐसा है, जहां पांचवी कक्षा में भी बोर्ड एग्जाम का प्रावधान है। दिलचस्प ये है कि पांचवी, आठवीं, नवीं और ग्यारहवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा के सिस्टम को हाईकोर्ट ने पहले रद्द कर दिया था लेकिन फिर अगले ही दिन अपने ही फैसले पर रोक लगा दिया। यह मामला कर्नाटक से जुड़ा है। कर्नाटक हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने इन कक्षाओं के बोर्ड एग्जाम को रद्द कर दिया था लेकिन अब अगले ही दिन डिविजन बेंच यानी खंडपीठ ने इस फैसले पर रोक लगा दिया। इससे अब ये परीक्षाएं 11 मार्च से शुरू हो सकेंगी।
जस्टिस के सोमशेखर और जस्टिस राजेस राय के ने 7 मार्च को जस्टिस कृष्ण दीक्षित के फैसले पर स्टे लगाया। हालांकि कोर्ट ने 7 मार्च को यह कहा कि इस मामले में बिना कोई राय दिए फैसले पर रोक लगाने की जरूरत दिख रही है। हाईकोर्ट ने 6 मार्च को कक्षा 5,8 और 9 के लिए बोर्ड परीक्षा आयोजित करने के फैसले को रद्द कर दिया था। इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ फैसला सुनाया था और रजिस्टर्ड अनऐडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के तर्कों का समर्थन करते हुए इन कक्षाओं के बोर्ड एग्जाम पर रोक लगाया था। उनका कहना है कि इन कक्षाओं के लिए बोर्ड एग्जाम शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के निरंतर और व्यापक मूल्यांकन (CCE) पर जोर देने के विपरीत हैं।
पिछले साल भी उठा था मामला
ऐसा ही एक मामला पिछले साल मार्च में उठा था, जब हाईकोर्ट ने कक्षा 5 और कक्षा 8 में बोर्ड लेवल एसेसमेंट लागू करने के शिक्षा विभाग के सर्कुलर को रद्द कर दिया था। यह नियम स्टेट सिलेबस में पढ़ने वाले छात्रों पर लागू होता और प्रश्न पत्र कर्नाटक स्कूल एग्जामिनेशंस को डिजाइन करना था। शिक्षा विभाग के नोटिस को ऑर्गेनाइजेशन फॉर अनऐडेड रिकग्नाइज्ड स्कूल्स और रजिस्टर्ड अनऐडेड प्राइवेट स्कूल्स मैनेजमेंट एसोसिएशन ने चुनौती दी थी। हालांकि बाद में फिर डिविजन बेंच ने कुछ बदलावों के साथ एग्जाम की मंजूरी दी थी। कर्नाटक सरकार ने फिर सितंबर 2023 में नोटिफिकेशन के जरिए कक्षा 9 के लिए ऐसा ही नियम पेश किया था।