आज 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अगर कंपनियों में महिलाओं के दबदबे की बात करें तो भारतीय कंपनियों के बोर्ड में पिछले पांच वर्षों के दौरान महिलाओं की संख्या बढ़ी है। इसका खुलासा डेलॉयट (Deloitte) की एक रिपोर्ट से हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में भारतीय कंपनियों के बोर्ड में उनकी हिस्सेदारी 18.3 फीसदी थी। हालांकि अभी भी यह वैश्विक औसत से काफी कम है। वैश्विक स्तर पर कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं की औसत भागीदारी 23.2 फीसदी है। डेलॉयट ने अपनी 'Women in the boardroom: A global perspective' रिपोर्ट के लिए 50 देशों की 18,000 से अधिक कंपनियों की स्टडी की। इसमें भारत की 400 कंपनियां शामिल हैं।
सबसे अधिक इस सेक्टर में रहा महिलाओं का दबदबा
बोर्ड की प्रमुख बनने के मामले में महिलाओं की भागीदारी बेशक 2018 में 4.5 फीसदी से घटकर 2023 में 4.1 फीसदी पर आ गई लेकिन महिला सीईओ की संख्या इस दौरान 3.4 फीसदी से उछलकर 5.1 फीसदी पर पहुंच गई। सेक्टरवाइज बात करें तो सर्वे में शामिल हर सेक्टर की कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। सबसे अधिक हिस्सेदारी लाइफ साइंसेज एंड हेल्थकेयर सेक्टर में रही जिसमें कंपनी के बोर्ड्स में 21.3 फीसदी महिलाएं हैं। इसके बाद टेक, मीडिया और टेलीकॉम में 20.5 फीसदी, कंज्यूमर बिजनेस में 19.7 फीसदी, मैनुफैक्चरिंग में 17.4 फीसदी और फाइनेंशियल सर्विसेज में 16.9 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं की है।
लेकिन नहीं मिल रहा कोई पॉजिटिव संकेत
डेलॉयट दक्षिण एशिया की चेयरपर्सन शेफाली गोराडिया का कहना है कि कंपनियों के बोर्ड में अब बदलाव की जरूरत है। चूंकि कई कंपनियां सीईओ या सीएफओ का अनुभव वालों को बोर्ड में शामिल करना चाहती हैं, तो बोर्ड में महिलाओं की बढ़ती संख्या से जुड़े आंकड़े भविष्य के लिए कोई पॉजिटिव संकेत नहीं दे रहे हैं। शेफाली का कगना है कि भारतीय कंपनियों को अपने ढर्रे में बदलाव लाना चाहिए और पिछली भूमिकाओं के मुकाबले क्षमताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। भारतीय कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं की 2023 में 18.3 फीसदी रही जो 2018 में 13.8 फीसदी और 2021 में 17.1 फीसदी थी।