क्या NEET (UG)-2024 विवाद को कोचिंग संस्थानों ने हवा दी है, खासकर वो जिन्हें इस बार कम सिलेबस और आसान प्रश्न पत्रों के कारण नुकसान होने वाला है? सरकार के सूत्र इस ओर इशारा करते हुए दावा कर रहे हैं कि इस बार हंगामा करने वालों में वे कोचिंग संस्थान सबसे आगे हैं, जिनके छात्रों ने खराब प्रदर्शन किया है। केंद्र ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने 1,563 उम्मीदवारों को दिए गए ग्रेस मार्क्स वापस लेने का फैसला किया है, जिनके पास अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की तरफ से कराई जा रही दोबारा परीक्षा में शामिल होने का विकल्प होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने काउंसलिंग प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि कुछ कोचिंग संस्थान पूरी परीक्षा पर संदेह पैदा कर रहे हैं, जबकी पेपर लीक का कोई सबूत नहीं है।
सिलेबस में लगभग 15% की कटौती
CNN-News18 के मुताबिक, सूत्रों ने ये भी दावा किया कि दूसरे कोचिंग इंस्टीट्यूट एकदम चुप हैं। इस बार, NEET (UG) परीक्षा में सिलेबस में लगभग 15% की कटौती देखी गई, आवेदकों की संख्या लगभग 23.3 लाख बढ़ गई और प्रश्न पत्र भी आसान था।
सूत्रों ने कहा कि आसान प्रश्नपत्र और कम सिलेबस का असली नुकसान कोचिंग संस्थानों को होता है, जो बड़े और कठोर सिलेबस के ऊपर ही फलते-फूलते हैं, क्योंकि तभी छात्र भी उनके पास आते हैं।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि NEET (UG)-2024 के मामले में एक आसान सिलेबस कोचिंग इंस्टीट्यूट को प्रभावित करता है, क्योंकि कुछ ही छात्रों को कोचिंग की जरूरत महसूस होती है। इस साल कट-ऑफ ज्यादा थी, क्योंकि परीक्षा पूरी करने के लिए 20 मिनट एक्सट्रा दिए गए थे।
सिलेबस घटाने से क्या फायदा?
सूत्रों ने कहा कि कम सिलेबस के साथ, छात्र अपनी पढ़ाई समय पर पूरी कर सकते हैं, जिससे रिवीजन के लिए काफी समय मिलता है और इससे बेहतर प्रदर्शन और ज्यादा मार्क्स आते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि बिनी किसी अटेंप्ट लिमिट के साथ परीक्षा में बैठने के लिए कोई अपर एज लिमिट भी नहीं है, जिसके कारण अनुभवी उम्मीदवारों को बाद के अटेंप्ट में ज्यादा नंबर आते हैं।
सूत्रों ने कहा कि मुश्किल प्रश्न पत्र से कोचिंग इंडस्ट्री को फायदा होता है, लेकिन ग्रामीण छात्र, जो महंगी कोचिंग नहीं ले सकते, वे ऐसे माहौल में कंपटीशन नहीं कर पाएंगे।
क्या नए कानून से नाराज हो गए कोचिंग सेंटर?
सरकार ने इस फरवरी में कठोर सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून भी लागू किया है, जो कोचिंग संस्थानों के कई प्रमुख पहलुओं को शामिल करते हुए कई गाइडलाइंस लेकर आया है।
कानून में कोचिंग सेंटर कई जिम्मेदारियां तय की गई हैं, जैसे रजिस्ट्रेशन के लिए उसकी शर्तें और जरूरी दस्तावेज, फीस से जुड़े मुद्दे, कोचिंग सेंटर बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की रूपरेखा तैयार करना, कोचिंग सेंटर के लिए आचार संहिता, बच्चों की मानसिक स्थिति को प्रथामिकता दाने, कोचिंग सेंटरों के भीतर काउंसर और साइकोलॉजिस्ट होना, किसी भी तरह का बैच डिवाइडेशन नहीं और रिकॉर्ड का रखरखाव भी हो।
सूत्रों ने कहा कि इससे कोचिंग संस्थान परेशान हो सकते हैं, जो अब NEET-2024 विवाद के जरिए NTA की विश्वसनीयता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।