अगर आप असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी (Phd) की पात्रता को खत्म कर दिया गया है। इस बात की जानकारी खुद यूजीसी (UGC) के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने दी है। बता दें कि इससे पहले विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए उम्मीदवारों के पास पीएचडी (Phd) की योग्यता का होना जरूरी था। लेकिन अब उम्मीदवार केवल नेट की परीक्षा पास करके भी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर पढ़ा पाएंगे।
नेट की एलिजिबिलिट पर भी बन पाएंगे असिस्टेंट प्रोफेसर
यूजीसी (UGC) के चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने उस्मानिया यूनिवर्सिटी के UGC-HRDC भवन का उद्घाटन करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी में अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए आयोग की नेट परीक्षा की योग्यता भी काफी होगी। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि उन लोगों को भी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त किया जा सके जिनके पास PhD की डिग्री नहीं है। एम जगदीश कुमार ने कहा कि देश में वन नेशन वन डेटा पोर्टेल को डेवलेप किया जा रहा है। यह उम्मीदवारों को यूजीसी की सभी जरूरी गाइडलाइन और जरूरी जानकारियां प्रदान करेगा।
सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए Phd को कर दिया था कंपलसरी
बता दें कि केंद्र सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाने के लिए पीएचडी को अनिवार्य बना दिया था। इस गाइडलाइन को साल 2021 से ही लागू किया जाना था पर कोविड 19 महामारी और लॉकडाउन के चलते इसे लागू नहीं किया जा सका। बाद में इसे लागू करने की टाइमलाइन को साल 2023 तक बढ़ाया गया था। पर अब यूजीसी ने विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाने के लिए पीएचडी की न्यूनतम पात्रता को खत्म कर दिया है। अब यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नियुक्ति नेट के आधार पर ही की जाएगी।