एलॉन मस्क की सोशल मीडिया कंपनी एक्स ने सरकार के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसमें सरकार पर सेंसरशिप का आरोप लगाया है, जो नियमों के खिलाफ है। एक्स ने कहा है कि सरकार के आईटी एक्ट के सेक्शन 79(3)(बी) और सहयोग पोर्टल के इस्तेमाल से गैरकानूनी सेंशरशिप की स्थिति बन गई है। ऐसा करना नियम के खिलाफ है। एक्स कॉर्प ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि सरकार सेक्शन 79(3)(बी) की गलत व्यवख्या कर कंटेंट हटाने का आदेश देती है।
सरकार का कदम सेक्शन 69ए के मुताबिक नहीं
X Corp की दलील है कि सरकार का ऐसा करना सेक्शन 69ए के मुताबिक नहीं है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने इकलौता वैलिड लीगल फ्रेमवर्क बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने श्रेया सिंघर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के 2025 के मामले में कहा था कि ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए सिर्फ इस लीगल वैलिड फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। मनीकंट्रोल ने एक्स की याचिका की कॉपी देखी है। यह याचिका केंद्र सरकार के X को यह कहने के बाद दाखिल की गई है कि उसे अपने एआई चैटबॉट Grok की तरफ से जेनरेट रिस्पॉन्स पर सफाई पेश करनी पड़ेगी।
27 मार्च को होगी मामले की अगली सुनवाई
हाल में हुई इस मामले की सुनवाई में सरकार ने कहा था कि सहयोग पोर्टल ज्वाइन नहीं करने के लिए एक्स के खिलाफ किसी तरह का एक्शन नहीं लिया गया है। कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार इस मामले किसी तरह की कार्रवाई करती है तो एक्स कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। कर्नाटक हाई कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी।
पहले भी सरकार के खिलाफ कोर्ट जा चुकी है एक्स
यह पहली बार नहीं है जब X Corp ने सरकार के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 2022 में एक्स ने सेक्शन 69ए के तहत कंटेंट हटाने के दिए गए आदेश को चैलेंज किया था। उसने तब कहा था कि सरकार के निर्देश में पारदर्शिता नहीं है और यह अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन करता है।
सेक्शन 69(ए) के प्रावधानों की अनदेखी
एक्स कॉर्प ने अपनी याचिका में कहा है कि सोशल मीडया प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटवाने का सेक्शन 79(3)(बी) का सरकार का इस्तेमाल करना सेक्शन 69(ए) के तहत तय फ्रेमवर्क के खिलाफ है। इस फ्रेमवर्क में कंटेंट हटाने के आदेश के लिए लिखित में कारण बताने को कहा गया है। फैसले से पहले सुनवाई का भी प्रावधान है। लेकिन, इन सभी की अनदेखी सरकार की तरफ से की जा रही है।
सरकार के सहयोग पोर्टल पर भी उठाए सवाल
एक्स की तरफ से उठाया गया एक बड़ा सवाल सहयोग पोर्टल को लेकर है। इस पोर्टल का प्रबंधन गृह मंत्रालय करता है। इस पोर्टल के जरिए राज्यों की पुलिस और कई सरकारी विभाग सीधे कंटेंट हटाने का आदेश देते हैं। ऐसा करने में वे सेक्शन 69ए के प्रावधानों का पालन नहीं करते हैं। एक्स की दलील है कि इस पोर्टल की वजह से कंटेंट सेंसरशिप की एक समानांतर व्यवस्था बन गई है। हजारों सरकारी अधिकारी बगैर पारदरशिता और दूरदृष्टि के कंटेंट हटाने का आदेश देते रहते हैं।