'CBFC फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इनकार नहीं कर सकता': कंगना रनौत की 'इमरजेंसी' को बॉम्बे HC से राहत!

Emergency Row: बॉलीवुड एक्ट्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत ने कहा कि सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने में देरी के कारण उनकी फिल्म 'इमरजेंसी' की रिलीज टलने के बाद उन्हें मुंबई में अपना बंगला बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा

अपडेटेड Sep 19, 2024 पर 6:14 PM
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Emergency Row: पूर्व पीएम दिवंगत इंदिरा गांधी सरकार में लगी 'इमरजेंसी' पर बनी कंगना रनौत की फिल्म विवादों में घिर गई है

Emergency Row: फिल्मों की रिलीज पर आपत्ति जताने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने पर जोर देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार (19 सितंबर) को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत की फिल्म 'इमरजेंसी' पर बुधवार 25 सितंबर तक फैसला लेने को कहा। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि रचनात्मक आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने कहा कि सेंसर बोर्ड कानून-व्यवस्था खराब होने की आशंका के कारण किसी फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इनकार नहीं कर सकता।

जस्टिस बीपी कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने BJP सांसद कंगना रनौत की फिल्म 'इमरजेंसी' को सर्टिफिकेट जारी करने के सिलसिले में निर्णय नहीं लेने पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के प्रति नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को 25 सितंबर तक फिल्म की रिलीज को लेकर निर्णय लेने का आदेश दिया।

CBFC से पूछे तीखे सवाल


पीटीआई के मुताबिक, पीठ ने पूछा कि क्या CBFC को लगता है कि इस देश के लोग इतने भोले-भाले हैं कि वे फिल्म में दिखाई गई हर बात पर विश्वास कर लेगे? याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सीबीएफसी राजनीतिक कारणों से फिल्म को सर्टिफिकेट जारी करने में देरी कर रहा है। इसपर हाई कोर्ट ने कहा कि फिल्म की सह-निर्माता कंगना रनौत खुद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद हैं। क्या सत्तारूढ़ पार्टी अपने सांसद के खिलाफ काम कर रही है?

कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत इंदिरा गांधी की मुख्य भूमिका निभाने के अलावा इसका निर्देशन और सह-निर्माण भी किया है। एक्ट्रेस ने इस सप्ताह की शुरुआत में सीबीएफसी पर रिलीज में देरी करने के लिए बाधा डालने का आरोप लगाया था।

पीठ ने कहा, "आपको (सीबीएफसी) किसी न किसी तरह से निर्णय लेना ही होगा। आपके पास यह कहने का साहस होना चाहिए कि यह फिल्म रिलीज नहीं हो सकती। कम से कम तब हम आपके साहस और निर्भीकता की सराहना करेंगे। हम नहीं चाहते कि सीबीएफसी टालमटोल की मुद्रा में रहे।"

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अदालत जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें सीबीएफसी को फिल्म "इमरजेंसी" के लिए सर्टिफिकटे जारी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

CBFC का जवाब

सेंसर बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने अदालत को बताया कि बोर्ड के अध्यक्ष ने फिल्म को अंतिम निर्णय के लिए पुनरीक्षण समिति को भेज दिया है। चंद्रचूड़ ने कहा कि सार्वजनिक अव्यवस्था फैलने की आशंका है। पीठ ने कहा कि सीबीएफसी ने उसके पिछले आदेश का पालन नहीं किया है और केवल एक विभाग से दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी डाल दी है। पीठ ने कहा कि सीबीएफसी को यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते किसी फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं दिया जा सकता।

25 सितंबर की डेडलाइन

हाई कोर्ट ने कहा, "इसे रोकना होगा। अन्यथा हम यह सब करके रचनात्मक आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पूरी तरह से अंकुश लगा रहे हैं।" अदालत ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि लोग फिल्मों में दिखाए जाने वाले दृश्यों के प्रति इतने संवेदनशील क्यों हो गए हैं? जस्टिस कोलाबावाला ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "हमें समझ में नहीं आता कि लोग इतने संवेदनशील क्यों हैं। फिल्मों में हमेशा मेरे समुदाय का मजाक उड़ाया जाता है। हम कुछ नहीं कहते। हम बस हंसते हैं और आगे बढ़ जाते हैं।" चंद्रचूड़ ने दो सप्ताह का समय मांगा, जबकि अदालत ने कहा कि निर्णय 25 सितंबर तक लिया जाना है।

चुनाव की वजह से विवाद?

'जी एंटरटेनमेंट' की ओर से वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने कहा कि यह सिर्फ समय बर्बाद करने और यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि फिल्म अक्टूबर में हरियाणा चुनाव से पहले रिलीज न हो। धोंड ने कहा कि राजनीतिक कारणों से फिल्म को प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है। पीठ ने राजनीतिक पहलू पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या याचिकाकर्ता यह दावा कर रहा है कि सत्तारूढ़ पार्टी खुद रनौत के खिलाफ है, जो फिल्म की सह-निर्माता और बीजेपी की लोकसभा सदस्य भी हैं।

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अदालत ने पूछा, "सह-निर्माता खुद बीजेपी सांसद हैं। वह सत्तारूढ़ पार्टी की सदस्य भी हैं। तो आप कह रहे हैं कि उनकी अपनी पार्टी अपने सदस्य के खिलाफ है?" धोंड ने दावा किया कि सत्तारूढ़ पार्टी समाज के एक खास वर्ग को खुश करने के लिए एक मौजूदा सांसद को नाराज करने पर उतारू है। जी एंटरटेनमेंट ने अपनी याचिका में दावा किया कि सीबीएफसी ने पहले ही फिल्म के लिए प्रमाणपत्र तैयार कर दिया था, लेकिन इसे जारी नहीं कर रहा है।

विवादों के बाद रिलीज पर रोक

फिल्म पहले 6 सितंबर को रिलीज होने वाली थी, लेकिन शिरोमणि अकाली दल समेत सिख संगठनों की आपत्ति के बाद यह विवादों में घिर गई। इन संगठनों का आरोप है कि फिल्म में सिख समुदाय को गलत तरीके से और ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

इस महीने की शुरुआत में हाई कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को फिल्म को तत्काल सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पीठ ने सेंसर बोर्ड को 18 सितंबर तक फिल्म को सर्टिफिकेट जारी करने के बारे में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

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