Saif Ali Khan News: बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान अटैक केस हर दिन कुछ ना कुछ नया खुलासा हो रहा है। सैफ अली खान के घर हमलावर कैसे घुसा, उसने सैफ पर हमला क्यों किया, इसकी मिस्ट्री अब भी बरकरार है। वहीं हमले की अनसुलझी गुथ्थी के बीच अब सैफ अली खान के इंस्योरेंश क्लेम को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। स्पताल में भर्ती होने के बाद उनके ₹25 लाख के कैशलेस बीमा क्लेम को घंटों में मंजूरी मिलने से विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला मुंबई के बांद्रा स्थित एक बड़े निजी अस्पताल से जुड़ा है।
इंस्योरेंश क्लेम पर छिड़ी नई बहस
मेडिकल कंसल्टेंट्स एसोसिएशन (AMC) ने भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) से सवाल किया है कि उन्होंने अभिनेता सैफ अली खान के लीलावती अस्पताल, बांद्रा में कैशलेस इलाज के लिए ₹25 लाख की जल्दी मंजूरी क्यों दी। एमसीसी ने इसे "प्राथमिकता देने वाला बर्ताव" करार दिया और कहा कि यह दावा कुछ ही घंटों में मंजूर किया गया, जो आम पॉलिसीधारकों के लिए सामान्य स्थिति नहीं है।
हेल्थ इंश्योरेंस एक्सपर्ट निखिल झा ने AMC की चिंताओं को साझा किया और दावा मंजूरी में प्रणालीगत असमानता की बात की। उन्होंने कहा कि अगर यह दावा किसी आम व्यक्ति का होता, तो बीमा कंपनी ने इसे मंजूर नहीं किया होता। उन्होंने आगे कहा कि, "बीमा कंपनी ने कुछ ही घंटों में सैफ अली खान के इलाज के लिए लीलावती अस्पताल को 25 लाख मंजूर किए। सामान्य प्रक्रिया में मेडिकल-लीगल मामलों में एफआईआर की कॉपी की मांग की जाती है। लेकिन बीमा कंपनी ने इस नियम को छोड़ते हुए तुरंत 25 लाख का कैशलेस अनुरोध मंजूर कर दिया।"
सैफ के परिवार ने किया 35 लाख का क्लेम
सोशल मीडिया पर लीक हुए दस्तावेजों से यह भी पता चला कि अभिनेता के परिवार ने कुल ₹35.95 लाख का क्लेम किया था। बीमा कंपनी ने इसमें से ₹25 लाख की मंजूरी तुरंत दे दी। डॉक्टर्स की संस्था ने इसे स्वास्थ्य बीमा प्रणाली में असमानता का उदाहरण बताया है। अगर ये कोई सामान्य व्यक्ति होता, तो कंपनी ने रीज़नेबल और कस्टमरी चार्ज अप्लाई करती और क्लेम का भुगतान नहीं किया होता।
निखिल झा का कहना है कि IRDAI को जवाब देना चाहिए कि निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस (सैफ के पास इसी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस है) ने एक सेलिब्रिटी को तरजीह क्यों दी और सामान्य लोगों के लिए क्लेम हासिल करना मुश्किल क्यों बना दिया गया है? उन्होंने कहा कि हम निजी अस्पतालों या सेलेब्रिटीज के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन हमारी मांग है कि आम मरीजों को भी वही सुविधा मिले, जो हाई-प्रोफाइल लोगों को दी जाती है।