Exclusive: पिछले साल लॉकडाउन के बाद सरकार ने मिनिमम इनकम सपोर्ट स्कीम पर किया था विचार

आमदनी की मदद से जुड़ी योजना पर पिछले कुछ वर्षों से विचार किया जा रहा है लेकिन इसे लेकर इकोनॉमिस्ट्स में सहमति नहीं है

अपडेटेड Jun 19, 2021 पर 11:51 AM

महामारी की मार झेलने वाले सबसे निर्धन तबके के लोगों को न्यूनतम आय सहायता योजना उपलब्ध कराने को लेकर सरकार ने पिछले वर्ष लॉकडाउन के बाद विचार किया था। देश में इकोनॉमिक स्टैटिस्टिक्स और डेटा कलेक्शन में सुधार के लिए बनाई गई स्टैंडिंग कमेटी के प्रमुख प्रणब सेन ने यह जानकारी दी।

सेन ने मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में कहा, "हम वास्तव में उन लोगों को आमदनी में मदद देने के बारे में सोच रहे थे जिनका रोजगार छिना था और उन्हें शहरों से वापस लौटना पड़ा था।"

उन्होंने बताया कि इस बारे में विचार विमर्श बेसिक आमदनी को लेकर किया गया था। यह 6,000 रुपये प्रति महीना तक हो सकती थी।

निर्धन तबके को बेसिक आमदनी उपलब्ध कराने का विचार पिछले कुछ वर्षों से चल रहा है। इसका उद्देश्य निर्धनता को समाप्त करना  और सब्सिडी पहुंचाने में कमियों को दूर करना है।

हालांकि, इसे लेकर अर्थशास्त्रियों के बीच सहमति नहीं है। कुछ अर्थशास्त्री केवल किसानों को आमदनी की मदद देने के पक्ष में हैं जबकि कुछ अन्यों का कहना है कि यह पूरी जनसंख्या में निर्धन तबके को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

पूर्व चीफ इकनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमणियन ने प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वार्षिक 18,000 रुपये की आमदनी उपलब्ध कराने का पक्ष लिया था। इसमें ग्रामीण जनसंख्या के 75 प्रतिशत को शामिल किया जाना था। इस योजना पर केंद्र सरकार का खर्च लगभग 2.64 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान था।


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