सुबह करीब 10 बजे नेशनल हाइवे 24 (NH 24), जिसे सबसे ज्यादा चलने वाला हाइवे कहा जाता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश को दिल्ली से जोड़ने वाला ये एक अहम रास्ता है, आज ये देखते ही देखते ट्रैक्टरों से भर गया। पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से किसान इस हाइवे के एक हिस्से पर डेरा डाले (Farmers Protest) हुए हैं, लेकिन गुरुवार का नजारा कुछ अलग ही था। हाइवे पर जहां तक नजर जा रही थी, वहां तक ट्रैक्टर नजर आ रहे थे और लगातार किसान एकता जिंदाबाद के नारों की गूंज कानों में पड़ रही थी।
गाजीपुर (Ghazipur Border) से शुरू हुआ ये ट्रैक्टर मार्च (Tractor March) नेशनल हाइवे 24 के जरिए डासना पहुंचा और वहां से फिर कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे (KMP Expressway) पर पहुंचा, लेकिन इस बीच जो देखने वाली बात थी, वो ये कि किसान बेहद ही व्यवस्थित ठंग से इस पूरे मार्च को एक्सप्रेसवे तक लेकर आए, क्योंकि जिन-जिन रास्तों से ये मार्च निकला वहां अक्सर बहुत जल्द ट्रैफिक जाम हो जाता है, लेकिन गनीमत रही कि ऐसा कुछ नहीं हुआ।
इसके पीछे कई कारण रहे। पुलिस और प्रशासन ने तो पूरे मार्च में अपनी भूमिका निभाई ही, लेकिन किसानों ने भी इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी। दरअसल किसानों की एक कॉर्डिनेशन कमेटी इस पूरे मार्च का मैनेजमेंट कर रही थी। जब हम इस मार्च को फॉलो कर रहे थे, तो एक दृश्य देखने को मिला, जब दो ट्रैक्टर लाइन तोड़ कर बाहर आ गए, तो उसी कॉर्डिनेशन कमेटी का एक वॉलनटियर अचानक उनके सामने आया और बेहद ही गुस्से भरे लहजे में कहा कि ये क्या है? पीछे चलो लाइन में... इससे साफ पता लगता है कि मार्च पूरी तैयारी के साथ आयोजित किया गया।
खैर हम मार्च को क्रॉस करते हुए कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे पर पहुंचे और देखा की जितने ट्रैक्टर गाजीपुर बॉर्डर से यहां आ रहे थे, उससे भी ज्यादा ट्रैक्टर पहले ही यहां पहुंच गए और उनका इंतजार कर रहे थे। इसके बाद वहां देखते ही देखते ट्रैक्टर बढ़ते गए और फिर शुरू हुआ असली शक्ति प्रदर्शन। हापुड़, मोदीनगर, बागपत, लखीमपुर खीरी, गढ़ मुक्तेश्वर और न जाने कितनी जगहों से वहां किसान अपने ट्रैक्टर लेकर पहुंचे।
वहीं इस बीच हमने जितने भी किसानों से बात की उन सभी का कहना था कि ये तो 26 जनवरी की तैयारी है, क्योंकि किसान इस बार 26 जनवरी के दिन ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर किसानों ने कहा कि अभी तो यहां पहुंचे हैं। अब पलवल के लिए आगे बढ़ेंगे, वहां हमारे नेता जो भी फैसला करेंगे उसे मानेंगे। गौर करने वाली बात ये है कि एक्सप्रेसवे पर पहुंचने के बाद भी किसानों का जो अनुशासन था, उसमें कोई कमी नहीं आई। वहां भी पहले सभी ट्रैक्टरों को एक लाइन में किया गया और फिर वहां से पलवल के लिए सभी ट्रैक्टर आगे बढ़े।
इसी तरह किसानों का एक मार्च पलवल से भी चला है और दोनों तरफ के मार्च, जिस जगह पर भी मिलेंगे, वहां उनकी चर्चा होगी और फिर वहां से सभी अपने-अपने शुरुआती जगह यानी गाजीपुर वाले किसान गाजीपुर और पलवल वाले वापस पलवल लौट जाएंगे। उधर किसान और सरकार के बीच कल एक और दौर की बातचीत होनी है, लेकिन उससे पहले किसानों के इस ट्रैक्टर मार्च को एक तरह उनका शक्ति प्रदर्शन कहना गलत नहीं होगा।
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