केंद्र सरकार ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए फिस्कल डेफिसिट के टारगेट का केवल 8.2 प्रतिशत पहले दो महीनों (अप्रैल और मई) में समाप्त किया है। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 59 प्रतिशत का था। पिछले वर्ष कोरोना के कारण रेवेन्यू और कैपिटल एक्सपेंडिचर दोनों में कमी आई थी।
कोरोना की दूसरी लहर के कारण राज्यों में लगाए गए लॉकडाउन से प्रोजेक्ट्स को लागू करने के साथ ही इकोनॉमिक एक्टिविटीज में भी देरी हुई है।
कंट्रोलर जनरल ऑफ एकाउंट्स के डेटा के अनुसार, मई तक कुल खर्च का 13.7 प्रतिशत किया हया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 16.8 प्रतिशत था।
Care Ratings के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा कि फिस्कल प्रदर्शन अच्छा रहा है क्योंकि अप्रैल में GST से टैक्स रेवेन्यू में बढ़ोतरी हुई, जबकि नॉन-टैक्स रेवेन्यू में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बड़ा योगदान दिया है।
उन्होंने बताया, "अप्रैल-मई में होने वाला पिछले वर्ष की सब्सिडी का भुगतान इस बार नहीं हुआ क्योंकि राशि को बजट में मिला दिया गया था। इस वजह से एक्सपेंडिचर नियंत्रण में रहा। फूड डिपार्टमेंट का खर्च इससे कम रहा। इसके साथ ही नरेगा पर खर्च भी कम रहा है। फर्टिलाइजर पर सब्सिडी में भी गिरावट आई है।"
फिस्कल डेफिसिट को मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में GDP के 6.8 प्रतिशत पर रखने का सरकार ने लक्ष्य तय किया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह आंकड़ा 9.2 प्रतिशत था।