सरकार ने टेलीकॉम बिल में बड़ा बदलाव किया, हटाये गये दो विवादित क्लॉज

टेलीकॉम विभाग ने दो क्लॉज को ड्रॉप किया है। इसमें ऐसा प्रस्ताव था कि कोई भी कंपनी दिवालिया हो जाती तो सरकार उसे टेकओवर कर लेती। लेकिन इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी से जुड़ा प्रस्ताव हटाया गया है। वाणिज्य और वित्त मंत्रालय ने इसका विरोध किया था। दिवालिया होने पर स्पेक्ट्रम सरकार के पास वापस चला जाता

अपडेटेड Sep 18, 2023 पर 5:04 PM
सरकार संसद की मंजूरी लेकर किसी कंपनी पर ब्याज और पेनाल्टी माफ कर सकती थी लेकिन वित्त मंत्रालय के विरोध के चलते इस क्लॉज को भी हटा लिया गया

दूरसंचार विभाग (Telecom Department) ने टेलीकॉम बिल (Telecom Bill) में बड़ा बदलाव किया है। विभाग ने इस बिल में बदलाव करते हुए दो विवादित क्लॉस हटा दिये हैं। ये क्लॉज सरकार के ही अधीन काम करने वाले दो मंत्रालयों के विरोध के चलते हटाये गये हैं। सीएनबीसी-आवाज़ के असीम मनचंदा ने सूत्रों के हवाले से कहा कि वाणिज्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के विरोध के बाद टेलीकॉम विभाग द्वारा इन्हें हटाने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट में कई सारे प्रस्ताव रखे गये थे। 2 विवादित प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है। इन दो प्रस्तावों पर दो मंत्रालयों द्वारा विरोध किया गया था।

असीम ने आगे कहा कि जो दो क्लॉज को टेलीकॉम विभाग ने ड्रॉप किया है। उसमें से एक ऐसा था जो आईपीसी की धारा का उल्लंघन कर रहा था। इसमें ऐसा प्रस्ताव था कि कोई भी कंपनी दिवालिया होती तो सरकार उसे टेकओवर कर लेती। लेकिन इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी से जुड़ा प्रस्ताव हटाया गया है। वाणिज्य और वित्त मंत्रालय ने इसका विरोध किया था। दिवालिया होने पर स्पेक्ट्रम सरकार के पास वापस चला जाता।

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मंत्रालयों ने अपने विरोध में कहा कि इस क्लॉज से आईपीसी कोड का उल्लंघन हो रहा है। किसी विशेष विभाग या कंपनी के लिए ऐसा नहीं किया जा सकता है। लिहाजा टेलीकॉम विभाग ने इसे पूरी तरह से हटा लिया।

इसके अलावा किसी कंपनी पर ब्याज और पेनाल्टी को सरकार से माफ कर सकती थी। ऐसा प्रावधान करने का भी प्रस्ताव था। लेकिन सरकार द्वारा किसी भी कंपनी पर ब्याज और पेनल्टी माफ करने का क्लॉज भी हटा लिया गया है। इसके तहत सरकार संसद की मंजूरी लेकर ब्याज और पेनाल्टी माफ कर सकती थी। लेकिन वित्त मंत्रालय द्वारा इस क्लॉज का विरोध किया गया था जिसके बाद इसे भी खारिज कर दिया गया है।

 

 

 

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