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MGNREGA और सब्सिडी पर खर्च बढ़ाएगी सरकार, लेकिन खजाने पर नहीं होगा खास असर, ये है पूरा गणित

Government Spend in Election Year: अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और इस समय पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बज रहा है। इन सबके बीच सरकार की योजना इस वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी छमाही में फूड और खाद सब्सिडी के साथ-साथ मनरेगा (MGNREGA) के लिए अधिक फंड जारी करने की है। हालांकि इससे वित्त वर्ष 2024 के लिए राजकोषीय घाटे का जो लक्ष्य है, वह पटरी पर ही रहेगा

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Nov 09, 2023 पर 11:09 AM
MGNREGA और सब्सिडी पर खर्च बढ़ाएगी सरकार, लेकिन खजाने पर नहीं होगा खास असर, ये है पूरा गणित
सब्सिडी पर अतिरिक्त खर्च के बावजूद सरकार को भरोसा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी के 5.9 फीसदी के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।

Government Spend in Election Year: अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और इस समय पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बज रहा है। इन सबके बीच सरकार की योजना इस वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी छमाही में फूड और खाद सब्सिडी के साथ-साथ मनरेगा (MGNREGA) के लिए अधिक फंड जारी करने की है। हालांकि इससे वित्त वर्ष 2024 के लिए राजकोषीय घाटे का जो लक्ष्य है, वह पटरी पर ही रहेगा। एक सीनियर अधिकारी ने मनीकंट्रोल को सरकार की इस योजना के बारे में जानकारी दी। जानकारी के मुताबिक सब्सिडी पर अतिरिक्त खर्च के बावजूद सरकार को भरोसा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी के 5.9 फीसदी के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।

राजकोषीय घाटे पर पड़ेगा सीमित प्रभाव

अधिकारी के मुताबिक राजकोषीय घाटे में कोई बड़ा फर्क नहीं आएगा क्योंकि हाई सब्सिडी का फर्क सिर्फ तीन महीने के लिए ही होगा। वहीं इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में खर्चों की स्पीड थोड़ी धीमी थी। अधिकारी के मुताबिक मुफ्त खाद्यान्न योजना की मियाद आगे बढ़ाए जाने के केंद्र के फैसले का वित्त वर्ष 2024 के लिए राजकोषीय घाटे पर सीमित प्रभाव पड़ेगा। तीन महीने के विस्तार के चलते 15 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 नवंबर मुफ्त खाद्यान्न कार्यक्रम को पांच साल तक बढ़ाने की योजना का खुलासा किया। यह घोषणा अप्रैल या मई 2024 के आसपास होने वाले आम चुनावों से पहले की गई है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) नामक इस मुफ्त खाद्यान्न योजना के तहत गरीब परिवारों को बहुत सस्ती दरों पर प्रति व्यक्ति प्रति माह पांच किग्रा अनाज मिलता है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने की लागत पर 3,840 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा, जबकि भारत आटा योजना के तहत गेहूं का आटा 27.50 रुपये प्रति किग्रा की रियायती दर पर बेचने का सरकारी खर्च पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा अधिकारी ने बताया कि शहरी आवास सब्सिडी योजना जल्द ही लॉन्च होने वाली है, जिससे वित्त वर्ष 2024 में तीन महीने की अवधि में 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। इस योजना पर पांच साल में 60,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

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