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सरकार ग्लोबल मर्जर ओर एक्वीजीशन पर चाहती है बड़े अधिकार, कानून में बड़े संशोधन के लिए आज ही पेश हो सकता है बिल

यह प्रस्ताव भारत के इस विचार से उपजा है कि मैसेजिंग ऐप के बड़े भारतीय उपयोगकर्ता आधार को देखते हुए मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक के 2014 के व्हाट्सएप के अधिग्रहण जैसे सौदों पर उसकी राय होनी चाहिए

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 05, 2022 पर 9:52 AM
सरकार ग्लोबल मर्जर ओर एक्वीजीशन पर चाहती है बड़े अधिकार, कानून में बड़े संशोधन के लिए आज ही पेश हो सकता है बिल
कंपनी मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस खबर पर मांगी गई सफाई पर कोई जवाब नहीं दिया है

भारत अपने प्रतिस्पर्धा कानून (competition law) में बदलाव करने की तैयारी में है जिससे कि ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों को तमाम विदेशी विलय और अधिग्रहण के लिए भारत के एंटीट्रस्ट कानून के तहत मंजूरी लेनी पड़े। ये पीएम मोदी सरकार का एक महत्वाकांक्षी कदम है। इस कदम के जरिए भारत भी चीन और यूरोप की तरह तमाम ग्लोबल टेक कंपनियों पर अपना असर कायम कर पाएगा।

ब्लूमबर्ग न्यूज को मिले ड्रॉफ्ट बिल के मुताबिक अगर की ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी का भारत में बड़ा सब्सक्राइबर बेस है तो 20 अरब रुपए (25 करोड़ डॉलर) से ज्यादा के सभी विलय और अधिग्रहण सौदों के लिए भारत के एंटीट्रस्ट रेग्यूलेटर की मंजूरी लेनी होगी। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक ये बिल शुक्रवार तक पार्लियामेंट में पेश किया जा सकता है। इस सूत्र ने ये भी बताया कि संशोधनों को मंजूरी मिलने के बाद सरकार "पर्याप्त व्यावसायिक संचालन (substantial business operations)" को परिभाषित करने वाले नियम लाएगी। हालांकि कंपनी मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस खबर पर मांगी गई सफाई पर कोई जवाब नहीं दिया है।

बता दें कि भारत के मौजूदा एंटीट्रस्ट कानून रेग्यूलेटर को डील में शामिल कंपनियों के असेट साइज और कारोबार (turnover) के आधार पर सौदों की जांच करने की अनुमति देते हैं। लेकिन अब इसमें होने वाले संशोधन के जरिए देश में पहली बार रेग्यूलेटर (competition commission)को इस तरह के किसी सौदे की जांच उसके वैल्यू के आधार पर करने का अधिकार मिलेगा।

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