'जो गिरे वो उठे नहीं'...'हमारा दम घुट रहा है'... 'पहले बाबा जी जाएंगे फिर भक्त', हाथरस भगदड़ की डरावनी कहानी पीड़ितों की जुबानी
Hathras Stampede: इस भगदड़ में बचे लोगों ने बताया कि ये घटना 'सत्संग' खत्म होने के बाद हुई, जिसे स्वयंभू संत नारायण साकार विश्व हरि, जो खुद को 'भोले बाबा' भी कहते हैं, संबोधित कर रहे थे। वो 'सत्संगों' में सूट और टाई पहनता है और दावा करता है कि वो पहले पुलिस में था। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि भगदड़ तब हुई जब लोग 'भोले बाबा' के चरणों की 'रज' (धूल) लेने के लिए उनके पीछे दौड़े
Hathras Stampede: हाथरस जिले के सिकंदराराऊ अस्पताल के बाहर एक रिश्तेदार के शव के पास रोती महिलाएं
'भोले बाबा' के चरणों की धूल, जिसे लोकस भाषा में 'रज' कहा जाता है, उसे लेने के लिए दौड़ते लोग, दमघोंटू और उमस भरे माहौल से बाहर निकलने की कोशिश और बाबा के सेवादारों ने बिना ये जाने कि इसका नतीजा कितना घातक हो सकता है, बाहर निकलने का रास्ता ब्लॉक कर दिया.. ये सब वो बड़े कारण रहे, जिनके चलते जानलेवा भगदड़ मची। उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की सिकंदा राऊ तहसील के फुलरई गांव में सत्संग में भगदड़ मचने से महिलाओं और बच्चों समेत 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 250 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
इस भगदड़ में बचे लोगों ने बताया कि ये घटना 'सत्संग' खत्म होने के बाद हुई, जिसे स्वयंभू संत नारायण साकार विश्व हरि, जो खुद को 'भोले बाबा' भी कहते हैं, संबोधित कर रहे थे। वो 'सत्संगों' में सूट और टाई पहनता है और दावा करता है कि वो पहले पुलिस में था। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि भगदड़ तब हुई जब लोग 'भोले बाबा' के चरणों की 'रज' (धूल) लेने के लिए उनके पीछे दौड़े। कुछ लोग उस उमसभरी भीड़भाड़ से बाहर निकलने के लिए भी दौड़ पड़े।
लोग बाबा जी के चरणों की धूल लेने दौड़ पड़े
हाथरस के बिघपुरी मुरसान के रहने वाले कन्हैया लाल ने कहा कि उनकी मां और भतीजी, जो कार्यक्रम में शामिल हुई थीं, फिलहाल गायब हैं। उन्होंने News18 को बताया कि कार्यक्रम वाले पूरे इलाके को दो टेंट में बांटा गया था - एक जिसमें "बाबा जी" बैठे थे, साथ ही कुछ खास भक्त भी थे, जो उनके नजदीक बैठने के लिए पैसा दे सकते थे, जबकि बड़ी भीड़ दूसरे टेंट के नीचे बैठे थे, जो मेन टेंट से कुछ मीटर की दूरी पर था।
कन्हैया लाल ने कहा, “दोपहर के करीब 2 बजे थे, जब बाबा जी ने कार्यक्रम बंद करने की घोषणा की और अपनी गाड़ी की ओर जा रहे थे, तभी दोनों टेंट से लोग बाबा जी के चरणों से 'रज' (धूल) लेने और दमघोंटू, उमस भरे वातावरण से बचने के लिए दौड़ पड़े।"
बाबा जी की सेना ने बाहर निकलने का रास्ता बंद कर दिया
कन्हैया लाल याद करते हैं, "..लेकिन, बाबा की निजी सेना, जो हमेशा काली पोशाक में रहती हैं और खुद को 'NSG कमांडो' से कम नहीं मानती हैं। उन्होंने बिना सोच समझे, 'भोले बाबा' को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रास्ता बंद कर दिया।" उन्हें अब भी उम्मीद है कि उनकी मां और भतीजी सही सलामत हैं।
'हाथरस कांड' से बची एक महिला रानी देवी, जो इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपने रिश्तेदार के साथ बहराईच से आई थीं, उन्होंने कहा कि जब लोग धूल इकट्ठा करने और उनकी गाड़ी को छूने के लिए बाबा के पीछे भागे, तो बाबा की सेना ने रास्ता रोक दिया। इन्हें 'सेवादार' भी कहा जाता है।
जो गिरे, वे फिर कभी खड़े नहीं हुए
रानी देवी अभी तक इस सदमे से उबर नहीं पाई हैं। उन्होंने कहा, “एक दिन पहले इलाके में भारी बारिश होने के बाद से ये जगह बहुत उमस भरी, दम घुटने वाली और फिसलन भरी हो गई था। जो गिरे, वे फिर कभी खड़े नहीं हुए।"
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के रहने वाले एक और जिंदा बचे राजा राम ने कहा कि लगभग 250 'सेवादार' थे, बाहर निकलने वाला रास्ते से पहले एक दीवार की तरह खड़े थे, ताकि बाबा का काफिले हाईवे तक आराम से पहुंच जाए।
'पहले बाबा जी जाएंगे, फिर भक्त'
राजा राम ने पूरी घटना को याद करते हुए कहा, “हम सेवादारों से विनती करते रहे कि कृपया हमें जाने दें, क्योंकि भीड़ जमा हो रही है और उमस के कारण हम सांस नहीं ले पा रहे हैं, लेकिन हमारी दलील अनसुनी कर दी गई और वे कहते रहे कि 'पहले बाबा जी जाएंगे, फिर भक्त'।"
इससे भी ज्यादा घातक साबित हुए वो बड़ा मैनहोल, जो बाहर निकलने वाले रास्ते के नजदीक था। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि एग्जिट प्वाइंट पर भीड़ जमा हो गई और फिसलन भरी जमीन के कारण, लोग एक के बाद एक मैनहोल में गिरने लगे। इस कारण से भी मरने वालों की संख्य बढ़ी है।
प्रशासन ने लिया एक्शन
जिला मजिस्ट्रेट आशीष कुमार ने कहा कि हाथरस में भगदड़ एक निजी समारोह में हुई, जिसके लिए SDM की तरफ से अनुमति दी गई थी। आयोजन स्थल के बाहर सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की थी, जबकि अंदर की व्यवस्था की जिम्मेदारी आयोजकों की थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना की न्यायिक जांच का ऐलान कर दिया है। ये जांच हाई कोर्ट के किसी रिटायर जज के नेतृत्व और रिटायर सीनियर पुलिस अधिकारियों की देखरेख में होगी। साथ ही ADG के नेतृ्त्व में एक SIT भी बनाई गई है।
भगदड़ को लेकर एक FIR दर्ज की गई है, जिसमें बताया गया है कि अनुमति 80,000 लोगों के लिए दी गई थी, लेकिन 2,50,000 से ज्यादा लोग इसमें शामिल हुए थे। FIR में दावा किया गया है कि 'भोले बाबा' के निजी सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को काबू करने की कोशिश की, लेकिन मैदान में अफरा-तफरी मच गई। इसके अलावा FIR में आरोप लगाया गया है कि आयोजकों ने सबूत मिटा दिए और भगदड़ में फंसे लोगों की मदद भी नहीं की।