दुनिया की सबसे महंगी सब्जी जिसकी कीमत 85,000 रुपए किलो है, जानिए क्या है इसका नाम

हॉप शूट्स दुनिया की सबसे महंगी सब्जी है। इसके दाम सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। भारत में इसकी कीमत करीब 80,000 रुपये प्रति किलो है

अपडेटेड May 30, 2022 पर 10:43 PM
औषधीय गुणों की खान हॉप शूट्स दुनिया की सबसे महंगी सब्जी है। इसके दाम सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे (फाइल तस्वीर)

अगर आपसे कहा जाए कि बाजार से सबसे महंगी सब्जी लेकर आओ, तो शायद आप 200 या 400 रुपये किलो तक की कोई सब्जी ले आए। लेकिन एक सब्जी ऐसी भी है। जिसके भाव सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। हो सकता है इस सब्जी को खरीदने के लिए आपको लेन लेना पड़े। इसकी कीमत करीब 80,000 से 85,000 रुपये किलो के आसपास है। इस सब्जी की कीमत के सामने आपको सोने के दाम भी सस्ते लग सकते हैं। अब हम आपको इस सब्जी की खासियत के बारे में बताते हैं।

दुर्लभ है यह सब्जी

यह एक ऐसी सब्जी है जो आपको शायद ही किसी स्टोर पर या बाजार में दिखे। इसका कारण यह है कि इसकी खेती बीयर में इस्तेमाल करने के लिए की जाती है। इसका जो फूल होता है उसे 'हॉप कोन्स' कहते हैं। उस फूल का इस्तेमाल बीयर में किया जाता है। बाकी उसकी टहनियों को प्याज की तरह सलाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसको कच्चा भी खाया जा सकता है। यह सब्जी काफी तीखी होती है। लिहाजा इसका अचार भी बनाया जाता है। इसका अचार काफी स्वादिष्ट और फायदेमंद होता है।

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औषधीय गुणों का खजाना

हॉप शूट का इस्तेमाल जड़ी-बूटी के तौर पर भी किया जाता है। सदियों से इसका इस्तेमाल दांत के दर्द को दूर करने से लेकर टीबी के इलाज तक में होता रहा है। हॉप में ऐंटीबायॉटिक की प्रॉपर्टी पाई जाती है।

कैसे होती है खेती?

वैसे तो यह सदाबहार सब्जी है जो साल भर उगाई जा सकती है। लेकिन ठंडी का मौसम इसके लिए बेहतर माना जाता है। मार्च से लेकर जून तक इसकी खेती के लिए अच्छा समय माना जाता है। इसके लिए नमी और सूर्य के प्रकाश की जरूरत होती है। इस माहौल में इसका पौधा तेजी से बढ़ता है और एक दिन में इसकी टहनियां 6 ईंच तक बढ़ जाती हैं। शुरुआत में इसकी टहनियां बैंगनी रंग की होती हैं लेकिन बाद में हरी हो जाती हैं।

इतिहास

करीब 800 ईस्वी के आसपास इसके गुणों के बारे में पता चला। बाद में पता चला कि बीयर में इसे मिलाने से स्वाद बढ़ जाता है। सबसे पहले उत्तरी जर्मनी के किसानों ने बीयर का स्वाद बढ़ाने के लिए इसकी खेती शुरू की। उन दिनों बीयर बनाने के लिए कई कड़वे खरपतवारों और दलदली क्षेत्र में पैदा होने वाले पौधों का इस्तेमाल किया जाता था। उन पर टैक्स भी लगता था। 1710 में इंग्लैंड की संसद ने हॉप शूट्स पर टैक्स लगाया। साथ बियर में इस्तेमाल के लिए अनिवार्य कर दिया गया। तब से बीयर का स्वाद बढ़ाने के लिए हॉप शूट्स का इस्तेमाल किया जाता है।

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