Maha Kumbh 2025: आर्थिक नजरिये से भी अहम है दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन

प्रयागराज में महाकुंभ मेला का आयोजन 13 जनवरी 2025 से किया जा रहा है। महाकुंभ का मामला सिर्फ आध्यात्मिक आयोजन भर का नहीं है। इसका दायरा काफी व्यापक होता है। 56 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में संगम स्थल पर तकरीबन 40 करोड़ श्रद्धालुओं के हिस्सा लेने का अनुमान है। इस जगह पर गंगा, जमुना और पौराणिक कथाओं में मौजूद नदी सरस्वती का संगम होता है

अपडेटेड Dec 24, 2024 पर 6:07 PM
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केंद्र सरकार ने भी महाकुंभ 2025 के लिए 2,100 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी है।

प्रयागराज में महाकुंभ मेला का आयोजन 13 जनवरी 2025 से किया जा रहा है। महाकुंभ का मामला सिर्फ आध्यात्मिक आयोजन भर का नहीं है। इसका दायरा काफी व्यापक होता है। 56 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में संगम स्थल पर तकरीबन 40 करोड़ श्रद्धालुओं के हिस्सा लेने का अनुमान है। इस जगह पर गंगा, जमुना और पौराणिक कथाओं में मौजूद नदी सरस्वती का संगम होता है।

योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने महाकुंभ 2025 के लिए 5,435.68 करोड़ रुपये के लिए आवंटित किए हैं, जबकि 2019 में कुंभ पर 4,200 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इस बजट को 421 प्रोजेक्ट्स में लगाया जा रहा है, ताकि इस आयोजन के लिए बेहतर अनुभव प्रदान किया जा सके। इस बजट में से पहले ही 3,461.99 करोड़ रुपये कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए मंजूर किए जा चुके हैं।

केंद्र सरकार ने भी इसके लिए 2,100 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी है और शुरुआती किस्त के तौर पर 1,050 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। महाकुंभ के बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना था, 'महाकुंभ 2025 न सिर्फ एक आयोजन है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का नमूना है। दुनिया भर के श्रद्धालुओं के अनुभव को यादगार बनाने के लिए हरमुमकिन कोशिश की जा रही है।'


इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प

लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने की खातिर प्रयागराज में इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा रहे हैं। एक तरफ जहां सड़कों की मरम्मत और निर्माण का काम चल रहा है, वहीं रेलवे में ओवरब्रिज और अंडरपास बनाए जा रहे हैं। नदियों के किनारे सौदर्यीकरण की योजनाएं चल रही हैं और कटाव को नियंत्रित करने के लिए भी उपाय किए जा रहे हैं। प्रयागराज डिवेलपमेंट अथॉरिटी के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, ' हम प्रयागराज को मॉडल सिटी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ये तैयारियां सांस्कृतिक चेतना और आधुनिकीकरण को लेकर हमारी प्रतबिद्धता को दर्शाती हैं।'

डिजिटल और टूरिज्म प्रोजेक्ट्स में इनोवेशन

महाकुंभ 2025 में कई अहम पहल की गई है। भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास की कहानी बयां करने के लिए डिजिटल कुंभ म्यूजिम डिवेलप किया जा रहा है। इसके अलावा, अयोध्या, वाराणसी और चित्रकूट जैसे अहम धार्मिक स्ठलों को प्रयागराज से जोड़ने के लिए टूरिज्म सर्किट तैयार किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए स्पेशल टूर पैकेज में प्रयागराज की ऐतिहासिक चीजों को दिखाया जाएगा, जिसमें संगम, इलाहाबाद का किला और अक्षय वट शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार में टूरिज्म डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी मुकेश एम ने बताया, 'यह आध्यात्मिकता से इतर का भी मामला है। इसका मकसद प्रयागराज को ग्लोबल स्तर पर पर्यटन और संस्कृति के केंद्र के तौर पर पेश करना है। डिजिटल कुंभ म्यूजियम के जरिये हम अपनी विरासत के बारे में दुनिया को जानकारी देंगे।' 2025 के महाकुंभ में पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर है और 2,000 से भी ज्यादा अस्थायी ढांचों में पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।

आर्थिक और सांस्कृतिक असर

महाकुंभ 2025 के आयोजन से प्रयागराज को साल भर के लिए पर्यटन केंद्र में तब्दील करने में मदद मिल सकती है। 2019 के कुंभ की सफलता को ध्यान में रखते हुए प्रमोशनल कैंपेन में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक, दोनों तरह के पर्यटकों को टारगेट किया जा रहा है। सार्वजनिक जगहों और आधुनिक सुविधाओं के सौंदर्यीकरण का मकसद लोकल बिजनेस और हॉस्पैटिलिटी इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है। जानकारों के मुताबिक, यह आयोजन प्रयागराज के वरदान साबित होगा।

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