इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) पर कार्रवाई की है। सूत्रों ने बताया है कि केंद्र सरकार को FPI के बारे में कुछ खुफिया जानकारियां मिली थीं। इसके बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से कार्रवाई की गई है। इस तहत कुछ संदिग्ध FPI के खिलाफ जांच शुरू की गई है। उनसे उन फंडों के स्रोत के बारे में सवाल पूछे गए हैं, जो इंडिया आए हैं। इस बारे में कई FPI को नोटिस भी जारी किए गए हैं। इनमें कई सवाल पूछ गए हैं। फंड कलेक्शन के प्रोसेस के बारे में भी पूछा गया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सबसे बड़े 20 इनवेस्टर्स के नाम और उनके एड्रेसेज भी मंगाए हैं। FPI से पूछा गया है कि उन्होंने ऑर्डर प्लेस करने के लिए किन ट्रेडिंग टर्मिनल्स का इस्तेमाल किए। फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स की तरफ से राउंड-ट्रिपिंग का संदेह होने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ये कदम उठाए हैं।
नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उन FPI की पहचान करने की कोशिश कर रहा है जिनके काम करने का तरीका नियमों के मुताबिक नहीं है। बताया जा रहा है कि राउंड-ट्रिपिंग में ऐसे कई देश या इलाके शामिल हैं, जहां टैक्स बहुत कम है या नहीं के बराबर है। इनमें Cayman Island, Bahamas, Bermuda और सिंगापुर सहित कई ज्यूरिडिक्शन शामिल हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट FPI के संभावित निवेशकों तक पहुंचने के तरीकों के बारे में भी पता कर रहा है।
भारतीय निवेशकों के निवेश के बारे में सवाल
सूत्रों ने बताया कि एफपीआई से यह भी पूछा जा रहा है कि क्या भारतीय निवेशकों ने भी उनके फंड्स में पैसे लगाए हैं। FPI को अपने एसेट अंडर मैनेजमेंट को नॉन-इंडियन इनवेस्टमेंट और इंडियन इनवेस्टमेंट के आधार पर अलग-अलग करने को कहा गया है। उन्हें यह भी बताने को कहा गया है कि किस इनवेस्टर ने कितना इनवेस्ट किया है। नियम के मुताबिक, रेजिडेंट इंडियंस सिर्फ ऐसे FPI के फंड में निवेश कर सकते हैं, जिसके कुल निवेश में इंडिया की हिस्सेदारी 50 फीसदी से कम है। दूसरी शर्त यह है कि फंड का 50 फीसदी से ज्यादा NRI के पास नहीं होना चाहिए।