जानें क्यों मानवीय सहायता को सभी तरह के प्रतिबंधों से बाहर नहीं रखना चाहता भारत? UN सुरक्षा परिषद में मतदान से रहा दूर

भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में उस प्रस्ताव पर हुए मतदान से दूर रहा, जिसमें मानवीय सहायता को संयुक्त राष्ट्र के सभी तरह के प्रतिबंधों के दायरों से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है

अपडेटेड Dec 10, 2022 पर 1:59 PM
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भारत मतदान से अनुपस्थित रहने वाला इकलौता देश रहा, जबकि 14 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मदतान किया

भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में उस प्रस्ताव पर हुए मतदान से दूर रहा, जिसमें मानवीय सहायता को संयुक्त राष्ट्र के सभी तरह के प्रतिबंधों के दायरों से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है। भारत ने जोर देकर कहा कि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों ने इस तरह की छूट का भरपूर फायदा उठाया है और उन्हें इससे वित्तीय मदद जुटाने और लड़ाकों की भर्ती करने में मदद मिली है। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। बता दें कि 15 सदस्यों वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता फिलहाल भारत के पास है। परिषद में अमेरिका और आयरलैंड ने मिलकर एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें मानवीय सहायता को किसी भी तरह के प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है। अमेरिका ने जोर देकर कहा कि अपनाए जाने के बाद यह प्रस्ताव ‘‘अनगिनत जिंदगियों को बचाएगा।’’

शुक्रवार को इस प्रस्ताव पर मतदान के दौरान भारत इससे दूर रहा। भारत मतदान से अनुपस्थित रहने वाला इकलौता देश रहा, जबकि परिषद के बाकी 14 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मदतान किया। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि समय पर मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पैसे, दूसरे वित्तीय एसेट्स, आर्थिक संसाधनों और वस्तुओं व सेवाओं की सप्लाई के लिए समय पर भुगतान या प्रॉसेसिंसग जरूरी है। ऐसे में इनकी अनुमति दी जाती है और ऐसा होना प्रतिबंध समिति की ओर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं होगा।

UN सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा, “हमारी चिंताएं आतंकवादी संगठनों की ओर से इस तरह की मानवीय छूट का भरपूर फायदा उठाने और 1267 प्रतिबंध समिति सहित अन्य प्रतिबंध समितियों का मजाक बनाने के स्पष्ट उदाहरणों से पैदा हुई हैं।”


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कंबोज ने पाकिस्तान और उसकी जमीन पर मौजूद आतंकी संगठनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हमारे पड़ोस में कई आतंकवादी संगठनों ने इन प्रतिबंधों से बचने के लिए खुद को मानवीय संगठनों और नागरिक समाज समूहों के रूप में पुनर्स्थापित किया है और ऐसे कई मामले सामने आए हैं। इनमें वे संगठन भी शामिल हैं जिन पर सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंध लगाया हुआ है।”

कंबोज का इशारा जमात-उद-दावा (Jud) की तरफ था, जो खुद को एक परोपकारी संगठन बताता है, लेकिन उसे व्यापक स्तर पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन के रूप में देखा जाता है। जमात और लश्कर की ओर से संचालित संस्था फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) और जैश-ए-मोहम्मद (JEM) की ओर से समर्थित अल रहमत ट्रस्ट भी पाकिस्तान में स्थित हैं।

कंबोज ने कहा, “ये आतंकवादी संगठन धन जुटाने और लड़ाकों की भर्ती करने के लिए मानवीय सहायता के रूप में मिली छूट का फायदा उठाते हैं।” उन्होंने कहा, “भारत 1267 (प्रतिबंध समिति) के तहत प्रतिबंधित ऐसे संगठनों को मानवीय सहायता प्रदान करते समय उचित सावधानी बरतने का आह्वान करता है।”

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