भारत रैनसमवेयर यानि डिजिटल फिरौती के लिए साइबर अटैक के मामले में दुनिया में छठे स्थान पर आ गया है। ऐसे में आइए जानते हैं क्या बला है रैनसमवेयर और इससे कैसे बचें। ये सब बताने के लिए हमारे साथ हैं India, PCI Security Standards Council के एसोसिएट डायरेक्टर नितिन भटनागर, Safe Security के को-फाउंडर राहुल त्यागी और साइबर वकील आशुतोष श्रीवास्तव।
भारत में रैनसमवेयर अटैक बढ़ा है। रैनसमवेयर अटैक के मामले में भारत 140 देशों में छठे नंबर पर है। गूगल के विश्लेषण में ये खुलासा हुआ है। दुनिया में इजराइल में सबसे ज्यादा रैनसमवेयर अटैक होते हैं। 2021 में रैनसमवेयर अटैक तेजी से बढ़े हैं।
रैनसमवेयर कंप्यूटर में घुसपैठ करने वाला एक सॉफ्टवेयर है। ये कंप्यूटर के डेटा और एक्सेस पर कब्जा कर लेता है। और एक्सेस वापस देने के एवज में फिरौती मांगता है। आसान भाषा में ये डिजिटल किडनैपिंग जैसा होता है।
भारत में हुए इस तरह के अटैक की बात करें तो मई 2017 देश में दर्जनों अटैक हुए। 22 मार्च 2018 में हरियाणा बिजली निगम पर अटैक हुआ। इस अटैक के बाद सिस्टम को री-स्टोर होने में 1 हफ्ता लग गया। 29 अप्रैल 2019 को तेलंगाना बिजली निगम पर इसी तरह का अटैक हुआ। यहां भी सिस्टम रिस्टोर करने में कई दिन लगे।
इसमें अटैकर धोखा देकर मालवेयर भेजता है। सबसे ज्यादा ईमेल अटैचमेंट का प्रयोग होका है। लिंक या कई दूसरे माध्यम से भी इस तरह का अटैक संभव है। लिंक पर क्लिक करते ही मालवेयर एक्टिवेट हो जाता है और फाइलों को एनक्रिप्ट कर देता है। ये डाटा का एक्सेस लॉक भी कर देता है।
रैनसमवेयर से सुरक्षा के लिए किसी अनजान लिंक पर क्लिक ना करें। ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट करते रहें। इससे आप सुरक्षित रहेंगे। कंप्यूटर में एंटीवायरस जरूर रखें। अपने फाइल और डाटा का बैकअप रखें। हैकर्स को फिरौती का भुगतान ना करें। अटैक होने पर CERT और पुलिस को सूचना दें।