RHUMI 1 Launch: भारत 24 अगस्त को लॉन्च करेगा अपना पहला रियूजेबल हाइब्रिड रॉकेट RHUMI 1

फ्लेक्सिबिलिटी और रियूजेबल पर जोर देने के साथ डिजाइन किया गया, RHUMI 1 में कई अत्याधुनिक तकनीकें हैं। इसकी प्रमुख क्षमताओं में से एक एडजस्टेबल लॉन्च एंगल है, जिसे 0 और 120 डिग्री के बीच कहीं भी सेट किया जा सकता है, जिससे इसकी ट्रेजेक्टरी पर सटीक कंट्रोल होगा

अपडेटेड Aug 23, 2024 पर 9:33 PM
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RHUMI 1 Launch: भारत 24 अगस्त को लॉन्च करेगा अपना पहला रियूजेबल हाइब्रिड रॉकेट

भारत अपना पहला रियूजेबल हाइब्रिड रॉकेट, RHUMI 1, शनिवार, 24 अगस्त को सुबह 7:00 बजे चेन्नई के थिरुविदंदई से लॉन्च करेगा। लॉन्च एक मोबाइल लॉन्चर के जरिए किया जाएगा, जो देश के स्पेस रिसर्च प्रयासों में एक अहम मील का पत्थर है। RHUMI 1 तीन क्यूब सैटेलाइट और 50 PICO सैटेलाइट वाले पेलोड को एक सबऑर्बिटल ट्रेजेक्टरी में ले जाएगा। इस रॉकेट को तमिलनाडु स्थित स्टार्ट-अप स्पेस जोन इंडिया ने मार्टिन ग्रुप के सहयोग से विकसित किया है।

फ्लेक्सिबिलिटी और रियूजेबल पर जोर देने के साथ डिजाइन किया गया, RHUMI 1 में कई अत्याधुनिक तकनीकें हैं। इसकी प्रमुख क्षमताओं में से एक एडजस्टेबल लॉन्च एंगल है, जिसे 0 और 120 डिग्री के बीच कहीं भी सेट किया जा सकता है, जिससे इसकी ट्रेजेक्टरी पर सटीक कंट्रोल होगा।

RHUMI सीरीज में तीन मॉडल शामिल


रॉकेट में CO2-ट्रिगर पैराशूट सिस्टम, एक इको-फ्रेंडली और कॉस्ट इफेक्टिव मैकेनिज्म भी है, जिसकी मदद से लॉन्च के बाद रॉकेट कॉम्पोनेंट्स की सुरक्षित तरीके से रिकवर किया जा सकता है। रिसर्च वर्क के अलावा, RHUMI 1 का इस्तेमाल कृषि, पर्यावरण निगरानी और आपदा प्रबंधन में किया जा सकता है।

RHUMI सीरीज में तीन मॉडल शामिल हैं- RHUMI-1, RHUMI-2 और RHUMI-3, जो 1 Km से 500 Km तक की ऊंचाई तक पहुंचने में सक्षम हैं।

स्पेस जोन इंडिया और मार्टिन ग्रुप के बीच तीसरा प्रोजेक्ट

आगामी लॉन्च स्पेस जोन इंडिया और मार्टिन ग्रुप के बीच तीसरा सहयोग है। उनकी साझेदारी 2021 में 'डॉ एपीजे अब्दुल कलाम स्पेस रिसर्च पेलोड क्यूब्स चैलेंज 2021' के हिस्से के रूप में 1,200 छात्रों की ओर से विकसित 100 FEMTO सैटेलाइट के सफल लॉन्च के साथ शुरू हुई।

2023 में, उनके मिशन का टाइटल 'डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्टूडेंट सैटेलाइट लॉन्च- 2023' में भारत भर के सरकारी, आदिवासी और पब्लिक स्कूलों के 2,500 से ज्यादा छात्र शामिल थे, जिन्होंने 150 PICO सैटेलाइट रिसर्च एक्सपेरिमेंट क्यूब्स ले जाने वाले स्टूडेंट सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के डिजाइन और निर्माण में योगदान दिया।

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